डॉक्टरों और WHO की चेतावनी—एक मामूली खरोंच को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है ज़िंदगी पर भारी, जानिए क्या हैं बचाव के सही तरीके।
कुत्ते के काटने से होने वाले रेबीज के बारे में तो हम सभी ने सुना है। लेकिन अक्सर एक सवाल लोगों को उलझा देता है—क्या केवल खरोंच लगने से भी रेबीज हो सकता है? कई बार लोग खरोंच को मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। मगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती हैं कि कुछ परिस्थितियों में खरोंच भी संक्रमण का कारण बन सकती है।
रेबीज संक्रमण कैसे फैलता है?
रेबीज एक घातक बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवर की लार के संपर्क से फैलती है। यह वायरस घाव, खरोंच, या शरीर के नमी वाले हिस्सों (जैसे आंख, नाक, मुंह) से प्रवेश कर सकता है। WHO की जानकारी के अनुसार, यदि संक्रमित कुत्ते की लार किसी खुले घाव या खरोंच पर लग जाए तो संक्रमण संभव है।
खरोंच से संक्रमण की संभावना
1. लार के ज़रिए
यदि कुत्ते के पंजों या नाखूनों पर लार लगी हो और उसी से त्वचा पर खरोंच बने, तो वायरस प्रवेश कर सकता है।
2. पहले से कटे हिस्से से
यदि त्वचा पहले से फटी हो और उस पर कुत्ते की लार या पंजे का संपर्क हो, तो भी संक्रमण का जोखिम होता है।
3. दुर्लभ लेकिन दर्ज मामले
विज्ञान पत्रिकाओं में कुछ केस ऐसे मिले हैं, जहाँ बिना खून निकले खरोंच से भी संक्रमण हुआ। विशेषकर तब, जब खरोंच के साथ वायरस-युक्त लार का सीधा संपर्क हुआ हो।
काटने और खरोंच में फर्क
काटना (Bite): इसमें लार सीधा खून में चली जाती है। इसलिए यह ज़्यादा खतरनाक और आम कारण है।
खरोंच (Scratch): इसमें खतरा अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यदि लार मौजूद हो तो जोखिम को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसलिए खरोंच को हल्के में लेना ठीक नहीं।

खरोंच लगने पर तुरंत क्या करें?
1. घाव धोएँ: साबुन और साफ पानी से कम से कम 10–15 मिनट धोएँ।
2. एंटीसेप्टिक का प्रयोग करें: आयोडीन घोल से घाव साफ करें।
3. डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें: डॉक्टर को बताएं कि कुत्ते का टीकाकरण हुआ था या नहीं।
4. वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन: यदि खतरा हो तो डॉक्टर पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) यानी एंटी-रेबीज वैक्सीन और ज़रूरत पड़ने पर इम्युनोग्लोबुलिन देंगे।
5. कुत्ते पर नज़र रखें: 10–14 दिन तक देखें कि वह सामान्य है या उसमें रेबीज जैसे लक्षण (अत्यधिक आक्रामकता, पानी से डरना, अजीब आवाज़ें) तो नहीं।
चेतावनी भरी सच्ची घटना
इंग्लैंड में हाल ही में एक महिला की मौत हुई, जिसे एक आवारा कुत्ते ने केवल हल्की खरोंच दी थी। उसने इसे मामूली समझकर इलाज नहीं कराया। लेकिन कुछ समय बाद उसमें रेबीज के लक्षण उभरे और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। यह घटना इस बात का सबूत है कि खरोंच को नज़रअंदाज़ करना ख़तरनाक हो सकता है।
सुरक्षित रहने के उपाय
– अपने पालतू कुत्ते का समय पर रेबीज टीकाकरण कराएँ।
– आवारा कुत्तों से सुरक्षित दूरी बनाएँ।
– किसी भी प्रकार की खरोंच या काटने की घटना को हल्के में न लें।
– बच्चों को समझाएँ कि कुत्तों से खेलते समय सावधानी बरतें।
कुत्ते का काटना निश्चित रूप से रेबीज का मुख्य कारण है, लेकिन यह सोचना कि खरोंच से कभी संक्रमण नहीं होता ये भी गलत है। यदि खरोंच के साथ संक्रमित लार का संपर्क हो जाए, तो संक्रमण संभव है। हालाँकि, यह बहुत दुर्लभ है। इसलिए हर स्थिति में सावधानी बरतना ही सबसे अच्छा कदम है।
याद रखें—रेबीज का इलाज नहीं, केवल रोकथाम है। समय रहते घाव को साफ करना और वैक्सीन लगवाना ही जीवन बचा सकता है।