शेखपुरा विधानसभा चुनाव 2025 : जातीय समीकरण और गठबंधन तय करेंगे सीट का रुख
शेखपुरा, बिहार: शेखपुरा विधानसभा सीट (सँख्या-169) बिहार की उन चुनिंदा सीटों में शामिल है, जहाँ हर चुनाव में समीकरण बदलते हैं। यहाँ का मतदाता किसी एक दल का स्थायी समर्थक नहीं रहा है। 2010 से लेकर 2020 तक के चुनावी नतीजे दर्शाते हैं कि यह सीट पूरी तरह “स्विंग ज़ोन” है। 2025 में भी जातीय समीकरण, गठबंधन की मजबूती और उम्मीदवार की साख निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
पिछले चुनावों का संक्षिप्त विश्लेषण
- 2010: जेडीयू के रंधीर कुमार सोनी ने जीत हासिल की। उस समय नीतीश कुमार की लोकप्रियता चरम पर थी। कोइरी–कुर्मी और ओबीसी मतदाताओं के समर्थन से जेडीयू को मजबूती मिली।
- 2015: जेडीयू ने आरजेडी–कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा। रंधीर कुमार सोनी ने दोबारा जीत दर्ज की। यादव, मुस्लिम और दलित वोटों का महागठबंधन के पक्ष में ध्रुवीकरण एनडीए के लिए चुनौती बन गया।
- 2020: समीकरण बदल गए। आरजेडी के विजय कुमार यादव ने रंधीर कुमार सोनी को हराया। यादव–मुस्लिम गठजोड़ और एनडीए सरकार से असंतोष आरजेडी की जीत का मुख्य कारण बना।
जातीय समीकरण
- यादव मतदाता: आरजेडी का पारंपरिक आधार।
- कुर्मी–कोइरी/OBC: जेडीयू और एनडीए का मजबूत वोट बैंक।
- मुस्लिम मतदाता: “किंगमेकर” की भूमिका, ज्यादातर आरजेडी के साथ।
- दलित और महादलित वोट: अक्सर बिखरे रहते हैं, लेकिन सही उम्मीदवार इन्हें निर्णायक बना सकता है।
यह स्पष्ट है कि केवल जातिगत समर्थन पर जीत की गारंटी नहीं है। गठबंधन, उम्मीदवार की छवि और स्थानीय मुद्दों की भूमिका भी निर्णायक रहती है।
प्रमुख चुनावी मुद्दे
- बेरोज़गारी और पलायन: युवा बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
- सड़क, पानी और बिजली: अधूरी परियोजनाएँ और खराब बुनियादी ढाँचा।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: कॉलेज और अस्पतालों की कमी।
- बाढ़ और कृषि: गंगा किनारे बाढ़ और किसानों की समस्याएँ।
- स्थानीय नेतृत्व: उम्मीदवार की छवि और जनसंपर्क का असर।
2025 की तैयारियाँ
महागठबंधन (आरजेडी–कांग्रेस): 2020 में मिली जीत के बाद आरजेडी अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहती है। यादव–मुस्लिम समीकरण बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी चुनौती है।
एनडीए (जेडीयू–भाजपा): रंधीर कुमार सोनी जैसे नेताओं का संगठनात्मक नेटवर्क अभी भी मजबूत है। अगर एनडीए एकजुट होकर चुनाव लड़े तो सीट पलट सकती है।
अन्य पार्टियाँ (लोजपा, बसपा, एआईएमआईएम): ये दल वोट कटवाने का काम कर सकते हैं। दलित और मुस्लिम वोटों का बिखराव नतीजे को प्रभावित करेगा।
असर और संभावनाएँ
शेखपुरा की जनता किसी एक दल को लगातार मौका नहीं देती। पिछले तीन चुनावों में लगातार बदलते समीकरण दर्शाते हैं कि जातीय समीकरण और गठबंधन रणनीति ही निर्णायक होगी।

2025 का बड़ा सवाल यह है:
- क्या आरजेडी अपनी 2020 की जीत को दोहरा पाएगी?
- या एनडीए फिर से सत्ता में वापसी करेगा?
शेखपुरा का नतीजा केवल इस विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर आसपास की सीटों और मगध–पटना क्षेत्र की राजनीति पर भी दिखाई देगा।
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