बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को देखते हुए महागठबंधन ने पटना में अपना घोषणा-पत्र का पहला भाग जारी किया।
राहुल गांधी ने कहा – “हमने 10 ठोस संकल्प पेश किए हैं। पंचायत और नगर निकायों में आरक्षण 20% से बढ़ाकर 30% किया जाएगा। सभी निजी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में कोटा लागू होगा। आरक्षण की 50% सीमा को तोड़कर इसे 9वीं अनुसूची में शामिल करेंगे।”
उन्होंने “नॉट फाउंड सूटेबल” जैसी नियुक्ति की प्रथा खत्म करने का भी वादा किया और कहा कि अत्यंत पिछड़ा वर्ग की सूची में सही प्रतिनिधित्व के लिए समिति बनेगी।

राहुल गांधी ने अपनी “मतदाता अधिकार यात्रा” का ज़िक्र करते हुए कहा –
“हमने बिहार के जिलों में युवाओं से मुलाकात की। संविधान पर हमला हो रहा है। पूरे देश में जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए और 50% आरक्षण की दीवार टूटनी चाहिए।”
साथ ही उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा – “गुजरात मॉडल दलित, पिछड़े और गरीबों पर बुलडोज़र चलाने वाला मॉडल है, जबकि अरबपति दोस्तों को ज़मीन मुफ्त में दी जाती है।”

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी कहा -“महागठबंधन सत्ता में आया तो अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम लागू करेंगे। पंचायत और शहरी निकायों में आरक्षण 20% से बढ़ाकर 30% करेंगे और शिक्षा, आवास व सरकारी ठेकों में विशेष लाभ देंगे।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा –”सत्ता में आने पर हम 10 सूत्री कार्यक्रम लागू करेंगे। पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों का उत्थान हमारी प्राथमिकता होगी।”
वहीं, तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार को “नकलची” बताते हुए कहा –”इनके पास अपना कोई विज़न नहीं। हमारे पेंशन, बिजली, महिला योजनाओं तक की नकल कर सकते हैं।”
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इसे गठबंधन की अंदरूनी खींचतान बताया और कहा –”कांग्रेस राजद के समानांतर खुद को स्थापित करना चाहती है। चुनाव से पहले ही दोनों दल अलग-अलग रास्ते पर हैं।”अमित मालवीय ने दावा किया कि “आजादी के बाद बिहार में पहली बार हो रही कांग्रेस कार्य समिति की बैठक वास्तव में तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के सपने के ताबूत में आखिरी कील है कांग्रेस और उनके महागठबंधन सहयोगियों के बीच ई सहमति बनती दिख रही है कि तेजस्वी को कभी भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा।