संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप का दावा – “युद्ध रोकने पर मिलना चाहिए था नोबेल शांति पुरस्कार”
फिलिस्तीन मान्यता पर यूरोप को घेरा, अवैध प्रवास और व्यापार नीति पर भी बोले ट्रम्प
संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने दावे दोहराए है । ट्रंप का कहना है कि उन्होंने विश्व में शांति स्थापित करने की दिशा में कई प्रयास किए हैं और इसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।
टेलीप्रॉम्प्टर खराब
ट्रंप को महासभा में 15 मिनट का समय दिया गया था, लेकिन उनके पहुंचते ही टेलीप्रॉम्प्टर खराब हो गया। इस पर ट्रंप ने कहा— “अच्छा हुआ, अब मैं दिल से बोल सकता हूं।” इसके बाद उन्होंने लगातार 55 मिनट का संबोधन दिया।
भारत-चीन पर लगाया आरोप
ट्रंप ने अपने भाषण में रूस-यूक्रेन युद्ध का ज़िक्र करते हुए भारत और चीन पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि भारत और चीन रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को फंड मुहैया करा रहे हैं।
युद्ध रोकने पर फिर दोहराया दावा
ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य वैश्विक शांति और स्थिरता स्थापित करना है। उन्होंने दोहराया—
“इन युद्धों को रोकने के लिए मुझे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। मुझे किसी इनाम की चाह नहीं, मेरा मकसद सिर्फ शांति बहाल करना है।”मैंने 7 जंगे रुकवाई है।
फिलिस्तीन पर बयान
हाल ही में कई यूरोपीय देशों द्वारा फिलिस्तीन को मान्यता देने के फैसले पर भी ट्रंप ने अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा करना हमास की गतिविधियों को अप्रत्यक्ष स्वीकृति देने जैसा है और इसे रोका जाना चाहिए।
अवैध प्रवासियों और व्यापार पर भी बोले
ट्रंप ने अपने संबोधन में अवैध प्रवासियों का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा है कि उनके कार्यकाल में अमेरिका में अवैध घुसपैठ पर काफी हद तक रोक लगी। उन्होंने यूरोप में बढ़ती अवैध प्रवासियों की संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां इस समस्या पर कोई गंभीर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
साथ ही उन्होंने व्यापार नीति पर भी चर्चा की और कहा कि अमेरिका सभी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन व्यापार दोनों ओर से संतुलित होना चाहिए।