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सीमांचल से बदलेगी बिहार की सियासत: ओवैसी

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किशनगंज से शुरू ओवैसी की “सीमांचल न्याय यात्रा” ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है

एआईएमआईएम इस बार सीमांचल को सत्ता परिवर्तन की कुंजी बनाने में जुटी।

 

किशनगंज/पटना। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चार दिवसीय “सीमांचल न्याय यात्रा” की शुरुआत की। किशनगंज से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए और एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की।

ओवैसी ने ठाकुरगंज और बहादुरगंज में पहली सभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सीमांचल को दशकों से सत्ता में बैठे दलों ने सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। उन्होंने कांग्रेस, राजद और जेडीयू पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीबी, बेरोजगारी और पलायन की जिम्मेदारी इन्हीं दलों की है।

सीमांचल पर विशेष फोकस क्यों?

ओवैसी की इस यात्रा को राजनैतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। 2020 के बिहार चुनाव में AIMIM ने सीमांचल की 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 5 सीटें जीती थीं। यह उनकी अब तक की सबसे बड़ी सफलता थी। इस बार पार्टी इस सफलता को और विस्तार देने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

ओवैसी पहले ही संसद में सीमांचल विकास परिषद बनाने की मांग उठा चुके हैं ताकि इस इलाके के लिए अलग से योजनाएं बनाई जा सकें।

INDIA ब्लाक से दूरी, अकेले चुनावी मैदान में

यह यात्रा उस समय शुरू हुई जब ओवैसी का INDIA गठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव ठुकरा दिया गया। ओवैसी ने कहा, “हम किसी गठबंधन के मोहताज नहीं है। हमारी लड़ाई सीमांचल के लोगों के अधिकार और न्याय के लिए है।”

यात्रा की रूपरेखा

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की चार दिवसीय “सीमांचल न्याय यात्रा” का पूरा कार्यक्रम तय हो गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस दौरान ओवैसी 24 से अधिक जनसभाएं करेंगे और हर जिले में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।

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