लद्दाख में पूर्ण राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गया।
छात्रों ने CRPF गाड़ी और बीजेपी कार्यालय को आग के हवाले किया।
लेह में बिना अनुमति प्रदर्शन या रैली पर रोक
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल को लेकर पिछले 15 दिनों से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे है। ऐसे में आज लेह लद्दाख बंद को लेकर हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, देखते ही देखते प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया और प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सीआरपीएफ की गाड़ी में आग लगा दी और भाजपा कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया।
सोनम वांगचुक ने तोड़ी भूख हड़ताल
प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी है। वांगचुक ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से शांति की अपील करते हुए कहा है कि हमारा मकसद हिंसा नहीं है, शांति से अपनी मांगों को पूरा कराना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिस और सेना के जवानों पर पथराव भी किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वांगचुक के साथ भूख हड़ताल पर बैठी दो अन्य महिलाओं की तबीयत खराब होने और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद इस प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है, बीमार प्रदर्शनकारी की पहचान अंचुक और अंचुक डोल्मा के रूप में हुई है बताया जा रहा है उनके बेहोश होने और अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद सभा में अशांति फैल गई और लेह हिल काउंसिल भवन पर पथराव किया गया।
बीजेपी दफ़्तर हुआ आग हवाले
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की भीड़ ने बीजेपी दफ़्तर के बाहर पहले पथराव किया बाद में उसे आग के हवाले कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है।

इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों कि मांग लद्दाख को पूर्णराज्य का दर्जा और से छठी अनुसूची में शामिल कराने को लेकर है । आयोजकों ने बताया कि केंद्र सरकार ने मामले के निर्णय को लेकर 6 अक्टूबर की तारीख तय की है लेकिन उनकी मांग इस तय तारीख से पहले समाधान करने की है।
लेह में बिना अनुमति जुलूस, रैली, मार्च पर बैन
लेह जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए जिले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। अब कोई भी जुलूस, रैली या मार्च बिना पूर्व अनुमति के नहीं किया जा सकेगा।
साथ ही आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति ऐसा बयान नहीं देगा जिससे शांति भंग हो या कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला इलाके में शांति बनाए रखने और हालात बिगड़ने से रोकने के लिए लिया गया है।
