नेताओं की जुबानी जंग से लेकर थाने तक का चक्कर, चुनाव से पहले बिहार की सियासत गरमाई

बिहार की सियासत इन दिनों गरमा गई है। विधानसभा चुनाव से पहले नेता एक-दूसरे पर ऐसे वार कर रहे हैं, जैसे अब वोट से ज्यादा केस और नोटिस में ही मुकाबला होगा।
सबसे पहले बात करते हैं प्रशांत किशोर और मंत्री अशोक चौधरी की। प्रशांत किशोर ने मंत्री पर 200 करोड़ के घोटाले और ज़मीन की हेराफेरी का आरोप लगा दिया था। जवाब में मंत्री साहब पीछे कहां हटने वाले थे, उन्होंने सीधे प्रशांत किशोर को 100 करोड़ का मानहानि का नोटिस भेज दिया। अब देखना ये है कि लड़ाई कोर्ट तक पहुँचती है या फिर जनता को सिर्फ बयानों का शो दिखाया जाएगा।

उधर, महागठबंधन ने भी अपनी मोर्चाबंदी तेज कर दी है। तेजस्वी यादव के पटना वाले घर पर बड़ी बैठक बुलाई गई। इसमें RJD, कांग्रेस, CPI और VIP पार्टी के बड़े नेता पहुंचे। साफ है कि विपक्ष चुनाव से पहले रणनीति मजबूत करने में जुट गया है।
इसी बीच कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया। पार्टी ने जमीन घोटाले के खिलाफ मुख्यमंत्री आवास घेराव करने का ऐलान किया। दोपहर 12:30 बजे सदाकत आश्रम से ये मार्च निकलेगा। इसमें कांग्रेस के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर तमाम नेता शामिल होंगे। मतलब सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरने की तैयारी है।
लेकिन सबसे बड़ा बवाल दरभंगा से उठा। AIMIM नेता और नगर पंचायत बिरौल के उपमुख्य पार्षद अख्तर शहंशाह ने RJD नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि “तेजस्वी ने उनकी बात अनसुनी की और फिर सुरक्षाकर्मी ने मारपीट कर दी। गाड़ी चढ़ाने की कोशिश में उनका पैर तक टूट गया। उन्होंने थाने में केस दर्ज करने के लिए आवेदन दिया और जान से मारने की धमकी का भी आरोप लगाया।”
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