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सीतामढ़ी विधानसभा चुनाव 2025 : RJD या BJP, कौन मारेगा बाज़ी?

सीतामढ़ी विधानसभा सीट 2025 में RJD और BJP के बीच कड़ा मुकाबला। जातीय समीकरण, पिछले चुनाव और प्रमुख मुद्दों का विस्तृत विश्लेषण।

सीतामढ़ी। बिहार के सीमांचल की राजनीति में सीतामढ़ी विधानसभा सीट (संख्या 28) हमेशा से अहम रही है। यहाँ मतदाता जातीय समीकरण, स्थानीय विकास और उम्मीदवार की छवि को देखकर फैसला करते हैं। यही वजह है कि पिछले तीन चुनावों में सत्ता का झंडा लगातार बदलता रहा है। 2025 का मुकाबला भी कड़ा होने के आसार हैं।

पिछले चुनावों का रिकॉर्ड

2010: बीजेपी ने बढ़त बनाई। उम्मीदवार की साफ छवि और शहरी वोटों के समर्थन ने पार्टी को जीत दिलाई।

2015: महागठबंधन की लहर में आरजेडी ने सीट छीन ली। यादव–मुस्लिम समीकरण और गठबंधन की मजबूती ने बीजेपी को पराजित किया।

2020: बीजेपी ने फिर वापसी की। एनडीए की रणनीति, सवर्ण और मध्यम वर्गीय वोटों का ध्रुवीकरण और उम्मीदवार की लोकप्रियता ने परिणाम पलट दिया

लगातार तीन चुनावों में अलग-अलग नतीजे बताते हैं कि सीतामढ़ी किसी भी दल की “सेफ सीट” नहीं है।

जातीय समीकरण

सीतामढ़ी की राजनीति की धुरी जातीय संतुलन है।

  • यादव और मुस्लिम मतदाता – आरजेडी का परंपरागत आधार, खासकर ग्रामीण इलाकों में।
  • सवर्ण (ब्राह्मण, भूमिहार) और वैश्य – बीजेपी/एनडीए के मजबूत समर्थक।
  • अनुसूचित जाति (SC) – कई बार संतुलन बदलने में निर्णायक।
  • अति पिछड़ा वर्ग (EBC) – बड़ी संख्या में मौजूद, अक्सर “किंगमेकर” की भूमिका में।

किसी भी दल के लिए सिर्फ एक जाति पर भरोसा करना जोखिम भरा है। व्यापक सामाजिक आधार साधना ज़रूरी है।

वोटिंग पैटर्न

2010 – बीजेपी की जीत

2015 – आरजेडी की जीत

2020 – फिर बीजेपी की जीत

यह पैटर्न दिखाता है कि सीतामढ़ी का मतदाता हर बार नया संदेश देता है और उम्मीदवार की छवि के साथ स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देता है।

2025 की चुनौती

आरजेडी: यादव–मुस्लिम वोटों का ठोस समेकन पार्टी के लिए सबसे बड़ा हथियार है। अगर SC और EBC समुदाय का समर्थन भी मिला तो आरजेडी आसानी से मुकाबले में आ सकती है।

बीजेपी/एनडीए: सवर्ण और शहरी वोटरों को बनाए रखने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में विकास एजेंडा मजबूत करना जरूरी होगा। उम्मीदवार की साफ छवि और स्थानीय काम जीत की कुंजी होंगे।

अन्य दल: छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार वोट काट सकते हैं, जिससे मुख्य दलों के समीकरण बिगड़ सकते हैं।

प्रमुख मुद्दे

सीतामढ़ी का भूगोल और सामाजिक ढांचा समस्याओं को भी विविध बनाता है।

1. सड़क, बिजली और पानी की सुविधा।

2. स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षा संस्थानों की कमी।

3. बाढ़ और जलभराव का संकट।

4. बेरोज़गारी और सरकारी योजनाओं का कमजोर क्रियान्वयन।

युवा और महिला मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

नतीजे का असर

सीतामढ़ी सीट पर हर बार सत्ता बदलती रही है। यहाँ के मतदाता किसी पार्टी के स्थायी समर्थक नहीं हैं। 2025 का चुनाव फिर कांटे का होगा। सवाल यही है—क्या बीजेपी अपनी पकड़ बनाए रखेगी या आरजेडी अपने गढ़ को दोबारा हासिल करेगी? इतना तय है कि सीतामढ़ी का फैसला सीमांचल की राजनीति को बड़ा संदेश देगा।

Shashwat Srijan

Content Writer

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