Search

माँ दुर्गा के इन मंदिरों में छुपा है शक्ति का राज़—दुनिया भर से क्यों आते हैं लाखों श्रद्धालु?

वाराणसी का दुर्गा कुंड, कोलकाता का दक्षिणेश्वर काली मंदिर और जम्मू की वैष्णो देवी

जानें कैसे माँ दुर्गा के मंदिर भक्तों को साहस, आस्था और ऊर्जा का अनुभव कराते हैं।

क्या आपने कभी किसी मंदिर में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस किया है, जैसे भीतर की सारी नकारात्मकता गायब हो गई हो और दिल में सिर्फ शक्ति और साहस भर गया हो?यही अनुभव भक्तों को होता है माँ दुर्गा के मंदिरों में। भारत में माँ दुर्गा को सिर्फ देवी नहीं, बल्कि शक्ति स्वरूपा माना जाता है। और यही वजह है कि देशभर में उनके मंदिरों का खास महत्व है।

वाराणसी का दुर्गा कुंड मंदिर

वाराणसी, सिर्फ भगवान शिव ही नहीं, बल्कि माँ दुर्गा की भक्ति का भी केंद्र है। यहाँ स्थित दुर्गा कुंड मंदिर, लाल रंग की भव्य इमारत के रूप में है जो 18वीं शताब्दी में रानी भवानिशंकर द्वारा निर्मित है। मंदिर के पास बना कुंड ही “दुर्गा कुंड” कहलाता है। मान्यता है कि यह मंदिर स्वयंभू है, यानी यहाँ की मूर्ति स्वतः प्रकट हुई थी। नवरात्रि के समय यहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा करने आते हैं।

कोलकाता का दक्षिणेश्वर काली मंदिर

माँ दुर्गा का एक और प्रसिद्ध स्वरूप—काली माँ—का मंदिर कोलकाता में है। दक्षिणेश्वर काली मंदिर 19वीं शताब्दी में रानी रासमणि ने बनवाया था। यहाँ माँ काली की भव्य मूर्ति “भवतारिणी” स्वरूप में स्थापित है। यह वही मंदिर है जहाँ रामकृष्ण परमहंस ने साधना की थी और उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद को जीवन की दिशा मिली। दुनिया भर से श्रद्धालु और शोधकर्ता यहाँ आध्यात्मिकता और ध्यान का अनुभव लेने आते हैं।

वैष्णो देवी धाम, जम्मू

भारत में अगर माँ दुर्गा के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध धाम की बात की जाए तो वैष्णो देवी मंदिर का नाम सबसे पहले आता है।

त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित यह धाम हर साल करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यहाँ माँ तीन रूपों में विराजमान हैं—महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती। मान्यता है कि “जो भी सच्चे मन से यहाँ जाता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।” यहाँ तक पहुँचने के लिए 12-14 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जिसे भक्त “माँ का बुलावा” मानकर खुशी से पूरी करते हैं।

क्यों है माँ दुर्गा के मंदिर विश्व स्तर पर खास?

आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मॉरीशस जैसे देशों में भी माँ दुर्गा की पूजा धूमधाम से होती है। कोलकाता का दुर्गा पूजा उत्सव तो UNESCO Intangible Cultural Heritage की सूची में भी शामिल किया जा चुका है।

आध्यात्मिक अनुभव

माँ दुर्गा के मंदिर में जाना एक अलग ही अनुभूति है। माँ दुर्गा के दरबार में ऊर्जा और साहस की लहर महसूस होती है।

नवरात्रि के दिनों में जब ढोल-नगाड़ों की धुन और “जय माता दी” की गूंज एक साथ सुनाई देती है, तो लगता है मानो पूरी प्रकृति माँ की शक्ति को महसूस कर रही हो।

आज की प्रासंगिकता

आज तनावपूर्ण जीवन में लोग सिर्फ भौतिक सुख की तलाश में नहीं हैं, बल्कि उन्हें मानसिक शक्ति और हिम्मत की भी ज़रूरत है। यहाँ जाने वाले कई भक्त कहते हैं कि “माँ की पूजा से मन शांत होता है और कठिन समय से लड़ने की ताकत मिलती है।”

आधुनिक मनोविज्ञान भी मानता है कि आस्था और आध्यात्मिकता मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

admin

Hi I am admin

Leave a Comment

Your email address will not be published.