चामुंडेश्वरी मंदिर दशहरा कार्यक्रम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट बोला ‘धर्म के आधार किसी को उद्घाटन से नहीं रोक सकते
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक दशहरा समारोह में बुकर विजेता बानू मुस्ताक को आमंत्रित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह राज्य द्वारा आयोजित कार्यक्रम है और इसमें धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता।
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें कर्नाटक सरकार के चामुंडेश्वरी मंदिर में दशहरा समारोह के उद्घाटन के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुस्ताक को आमंत्रित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए सवाल किया कि देश की प्रस्तावना क्या कहती है और राज्य, धर्म के आधार पर भेदभाव कैसे कर सकता है। अदालत ने साफ कहा कि यह कोई निजी आयोजन नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित समारोह है।
क्या थी याचिकाकर्ता की आपत्तियां
याचिकाकर्ता एच. एस. गौरव के वकील ने अदालत में कहा कि उन्हें उद्घाटन पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मंदिर परिसर के भीतर होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों पर आपत्ति है। उनका तर्क था कि यह पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष गतिविधि नहीं है,
वकील ने दलील दी कि समारोह में पूजा भी शामिल है, जिससे उनके अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के अधिकारों का उल्लंघन होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के मुताबिक राज्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल नहीं दे सकता। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह समारोह राज्य स्तर का आयोजन है और इसमें किसी तरह का धार्मिक भेदभाव मान्य नहीं हो सकता