बिहार चुनाव से पहले विपक्ष ने वोट चोरी का मुद्दा उठाया। अगर एनडीए हारा तो नीतीश कुमार महागठबंधन से हाथ मिला सकते हैं, जिससे मोदी सरकार संकट में पड़ सकती है।
सत्यम राज मेहरा , पटना: बिहार में चुनाव हो और देश की राजनीति में उठापटक न हो, ऐसा संभव नहीं है। मीडिया से लेकर तमाम राजनीतिक दलों के लिए बिहार चुनाव महत्वपूर्ण माना जाता है। अब बिहार चुनाव से ठीक पहले विपक्ष ने सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा कर मतदाताओं को साधने की पूरी कोशिश की है। अब ऐसे में यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या बिहार चुनाव के बाद केंद्र में मोदी की सत्ता चली जाएगी। दरअसल, यह बातें हवा हवाई नहीं हैं, कई ऐसे समीकरण हैं जिससे सरकार गिरने की संभावना जताई जा रही है।
अगर भाजपा बिहार चुनाव हारी तो केंद्र पर भी खतरा
बिहार में फिलहाल एनडीए की सरकार है और नीतीश कुमार सरकार के मुखिया हैं। अब ऐसे अगर भाजपा बिहार चुनाव हार जाती है तो नीतीश कुमार अपनी कुर्सी बचाने के लिए महागठबंधन के साथ जा सकते हैं। और यह कोई नई बात नहीं है। 2015 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ा, पर 2017 में एनडीए में वापसी कर ली। लेकिन 2022 में नीतीश वापस एनडीए छोड़कर महागठबंधन के साथ सरकार बना ली। हालांकि यह सरकार सिर्फ 17 महीने ही चल सकी। 17 महीने बाद नीतीश कुमार फिर से एनडीए में वापसी कर सरकार बनाई।
तो नीतीश कुमार का यह पैटर्न बताता है कि नीतीश कुमार अपनी कुर्सी बचाने के लिए कभी भी पलटी मार सकते हैं। ऐसे में अगर एनडीए बिहार चुनाव में पिछड़ती है तो नीतीश महागठबंधन के साथ सरकार बना सकते हैं।
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अगर पलटे नीतीश तो पलट जाएगी केंद्र सरकार
अगर चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने पलटी मारी तो केंद्र सरकार भी मुश्किल में पड़ सकती है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कई बार कह चुके हैं कि अब पलटी नहीं मरेंगे, लेकिन फिर नीतीश कब क्या करें इसकी संभावना कोई नहीं लगा सकता।
अब बात करते हैं आंकड़ों की
अगर मान लें कि नीतीश कुमार बिहार चुनाव के बाद एनडीए छोड़ महागठबंधन के साथ सरकार बनाते हैं, तो लोकसभा की स्थिति क्या होगी?
अभी एनडीए के पास 292 सीटें हैं, यानी बहुमत से 20 सीटें अधिक। इसमें जदयू के पास 12, चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी के पास 16, और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) के पास 5 हैं। यानी जदयू, लोजपा (रामविलास) और टीडीपी मिलकर कुल 33 सीटें हैं।
विपक्ष के पास 230 सीटें हैं, यानी बहुमत से 42 सीटें पीछे है। अगर चुनाव के बाद नीतीश पलटी मारते हैं, तो चंद्रबाबू नायडू और चिराग को अपने पाले में करना विपक्ष के लिए आसान होगा। ऐसे में विपक्ष बहुमत से सिर्फ 7 सीटें पीछे रह जाएगी। वहीं अन्य दल/निर्दलीय 21 सीटें हैं। अगर विपक्ष इसमें से 7 सांसदों को अपने पाले में लाने में कामयाब रहा, तो केंद्र सरकार पर खतरा मंडरा सकता है।

वोट चोरी विवाद के बाद विपक्ष पहले से मजबूत
राजनीति विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार खालील अहमद बताते हैं कि वोट चोरी मुद्दे पर विपक्ष ने चुनाव आयोग और सरकार को जमकर घेरा है और इसका फायदा चुनाव में भी मिल सकता है।
वोट चोरी मुद्दे के बाद विपक्ष पहले से ज़्यादा मजबूत स्थिति में दिख रही है।
बिहार चुनाव सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है। अगर नीतीश कुमार अपनी स्थिति बचाने के लिए पलटी मारते हैं और विपक्ष मजबूत होता है, तो केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि मोदी सरकार तुरंत गिर जाएगी। यह पूरी तरह राजनीतिक समीकरण और गठबंधनों पर निर्भर करेगा।
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