हिमांता बिस्वा सरमा का दावा, 2 लाख बंगाली हिंदुओं में से सिर्फ़ 25000 डाउटफुल वोटर्स ही बचे हैं
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि बंगाली हिंदुओं की D-वोटर सूची में संख्या दो लाख से घटकर अब सिर्फ 25 हजार रह गई है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1971 से पहले असम में रहने वालों को “100% भारतीय” माना है।
पूरा मामला क्या है?
असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिसवा सरमा ने कहा है कि बंगाली हिंदुओं के बीच “doubtful” वोटर्स की संख्या लगभग 2 लाख से कटकर अब सिर्फ 25,000 बची है। न्यूज़ एजेंसी ए.एन.आई के मुताबिक मुख्यमंत्री सरमा ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा कि डी-वोटर्स की सूची में जो लोग शामिल थे उनमें से अधिकांश अपने मामले अदालतों में जीत चुके हैं, अब केवल 25000 मामले ऐसे हैं जिन्हें अदालतों में अभी समाप्त किया जाना बाकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि असम समझौते के अनुसार कट-ऑफ तिथि 1971 से पहले असम में रहने वाले लोगों को 100% भारतीय माना जाएगा भले ही दस्तावेज़ अधूरे हों।
सरमा ने यह दावा किया कि यह मामले अदालतों द्वारा सुने जा रहे हैं, और कई मामले ऐसे हैं जहां बंगाली हिंदुओं को केवल 1971 शरण कैंप प्रमाण पत्र (Refugee Camp Certificate) दिया गया, लेकिन वे ‘कैम्पर सर्टिफिकेट’ नहीं हैं।
क्या है इसका राजनीतिक महत्व?
डी-वोटर्स की श्रेणी वर्षों से विवादों की वजह रही है क्योंकि इससे मतदाता सूची, नागरिकता प्रमाण और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकार घट सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2026 की असम विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को ज्यादातर निपटा लिया जाएगा