टूथपेस्ट से लेकर कॉफ़ी तक—GST काउंसिल के नए फैसले आप की जेब के लिए राहत बनकर आए हैं। जानिए कैसे ये बदलाव आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को आसान बनाने वाले हैं।
सोचिए, जब आप दुकान पर जाकर अपना पसंदीदा शैम्पू या सुबह की कॉफ़ी खरीदें और दुकानदार कहे—“अब ये पहले से सस्ता हो गया है!” तो आपका रिएक्शन क्या होगा?
“सच में? कैसे?”
यही है GST के नए नियमों का असर।
भारत सरकार ने हाल ही में कुछ ज़रूरी चीज़ों पर टैक्स स्ट्रक्चर बदला है, और इन बदलावों का सीधा असर हम-आप जैसे आम लोगों की लाइफ़स्टाइल पर पड़ रहा है।
आखिर क्या है नया बदलाव?
GST काउंसिल (Goods and Services Tax Council) ने हाल की बैठक में कई डेली यूज़ प्रोडक्ट्स की टैक्स दरों में कटौती की।
साबुन और शैम्पू: पहले 28% टैक्स लगता था, अब घटकर 18% हो गया।
टूथपेस्ट और हेयर ऑयल: पहले 28%, अब सिर्फ 18%।कॉफ़ी और चाय (पैक्ड वर्ज़न): पहले 18%, अब घटकर 12%। यानी जिन प्रोडक्ट्स को हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं, उनकी कीमत अब काफ़ी हद तक कम हो गई है।

आम आदमी की जेब को राहत
आप सोच रहे होंगे—“सिर्फ 5-10 रुपए सस्ते होने से क्या फर्क पड़ता है?” तो ज़रा सोचिए, जब हर महीने साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, कॉफ़ी, चाय जैसी चीज़ें आप कई बार खरीदते हैं, तो पूरे महीने का खर्च सैकड़ों रुपए तक कम हो सकता है। यानी ये बदलाव मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास फैमिलीज़ के लिए एक राहत की तरह है।
लाइफ़स्टाइल पर असर – छोटी बचत, बड़ी राहत
1. सेल्फ-केयर आसान हुआ – पहले कई लोग ब्रांडेड शैम्पू या साबुन छोड़कर सस्ते ऑप्शंस चुनते थे। अब कीमत घटने से क्वालिटी प्रोडक्ट्स खरीदना आसान होगा।
2. किचन बजट कंट्रोल – कॉफ़ी और चाय भारतीय घरों की रोज़मर्रा की ज़रूरत हैं। इनके सस्ते होने से पूरे महीने का किराना बजट कम हो गया।
3. युवा और स्टूडेंट्स को राहत – जो हॉस्टल या पीजी में रहते हैं और पॉकेट मनी से अपना खर्च चलाते हैं, उनके लिए ये बदलाव बड़ी मदद है।
कॉफ़ी और चाय का खास मामला
भारत में कॉफ़ी और चाय सिर्फ पेय पदार्थ नहीं, बल्कि कल्चर का हिस्सा हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादकों में से एक है। वहीं कॉफ़ी का प्रोडक्शन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में सबसे ज्यादा होता है। इन दोनों चीज़ों के सस्ते होने का मतलब है कि अब आम लोग बिना सोचे-समझे अपनी पसंद का स्वाद चुन सकते हैं।
इंडस्ट्री और मार्केट पर असर
GST कटौती का असर सिर्फ ग्राहकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा फायदा कंपनियों और मार्केट को भी होगा। FMCG (Fast Moving Consumer Goods) कंपनियों की सेल्स बढ़ेगी, क्योंकि जब प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे तो डिमांड भी बढ़ेगी। छोटे दुकानदारों और खुदरा व्यापारियों को भी इससे फायदा होगा, क्योंकि उनकी सेल बढ़ेगी।
ग्लोबल लेवल पर भारत की पोज़ीशन
GST के ऐसे फैसले भारत को दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट्स में और मज़बूत बनाते हैं। जब आम आदमी को राहत मिलती है, तो उसकी खरीदने की क्षमता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को भी ताक़त मिलती है।
तो क्या आगे और सस्ता होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सरकार डेली यूज़ और फूड प्रोडक्ट्स पर और टैक्स कटौती कर सकती है।
मतलब आने वाले महीनों में डेयरी प्रोडक्ट्स, पैक्ड फूड या हेल्थ सप्लीमेंट्स भी सस्ते हो सकते हैं।
