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पेट थेरेपी क्या है? तनाव, डिप्रेशन और अकेलेपन को हराने में कैसे मदद कर रहे है PET ANIMAL 

तनाव, डिप्रेशन और अकेलेपन को हराने में कैसे मदद कर रहे हैं आपके PET ANIMAL—साइंस भी मान चुका है इनका कमाल।

पेट थेरेपी तनाव, डिप्रेशन और अकेलेपन से राहत देती है। रिसर्च बताती है कि कुत्ते, बिल्लियाँ और पालतू जानवर खुशहाली हार्मोन बढ़ाकर मानसिक स्वास्थ्य सुधारते हैं। जानें पेट थेरेपी के फ

क्या कभी आपने ध्यान दिया है, जब आप उदास होते हैं और आपका कुत्ता या बिल्ली आपके पास आकर बैठ जाती है… तो अचानक ही दिल हल्का सा महसूस होने लगता है?” तो यही है पेट थेरेपी का जादू। आज के भागदौड़ और तनाव भरे दौर में, इंसान तनाव, डिप्रेशन और अकेलेपन से मुकाबला करने के लिए जहाँ दवाइयों और डॉक्टरों पर निर्भर है, वहीं हमारे पालतू साथी — कुत्ते, बिल्लियाँ और यहाँ तक कि खरगोश या पंछी तक हमें मानसिक शांति और भावनात्मक सहारा देने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

 पेट थेरेपी क्या है?

पेट थेरेपी (Animal Assisted Therapy) दरअसल एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जानवरों को इंसानों की मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक सेहत बेहतर करने के लिए शामिल किया जाता है।

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) के अनुसार, पेट थेरेपी डिप्रेशन, एंग्जायटी, पोस्ट ट्रामा स्ट्रेस डिसॉर्डर और अकेलेपन जैसी स्थितियों में लोगों को भावनात्मक सहारा देती है। भारत में भी अब कई अस्पताल, रिहैब सेंटर और ओल्ड-एज होम्स में पेट थेरेपी को अपनाया जा रहा है।

कैसे मदद करते हैं पालतू जानवर?

1. तनाव और चिंता कम करना

जब आप अपने पालतू जानवर (PET ANIMAL) को सहलाते हैं, तो शरीर में ऑक्सीटोसिन (happy hormone) रिलीज़ होता है और कोर्टिसोल (stress hormone) का स्तर कम होता है।

National Institutes of Health, अमेरिका की रिसर्च बताती है कि पेट ओनर्स का ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट नॉन-पेट ओनर्स से बेहतर होता है।

2. डिप्रेशन से राहत

बिल्लियों या कुत्तों के साथ खेलने से सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे मूड बूस्टर रसायन बढ़ते हैं। यही कारण है कि कई डॉक्टर अब मरीजों को पेट एनिमल रखने की सलाह भी देते हैं।

3. बच्चों और बुज़ुर्गों पर असर

बच्चों में पेट उनके सामाजिक कौशल और सहानुभूति को बढ़ाते हैं। वहीं बुज़ुर्गों के लिए पेट एक अभिन्न मित्र बन जाते हैं, जो अकेलेपन और एकांत को कम करते हैं।

हावर्ड रिपोर्ट बताती है कि जिन बुज़ुर्गों के पास पेट होते हैं, उनमें एकांत और डिप्रैशन का स्तर काफी कम होता है।

भारत में पेट थेरेपी का बढ़ता चलन

पहले जहाँ पेट सिर्फ़ घर की शोभा या सुरक्षा का साधन माने जाते थे, अब उन्हें मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के भागीदार के तौर पर देखा जा रहा है। 2022 में Max Hospital, दिल्ली ने अपने ICU में मरीजों के लिए “डॉग थेरेपी ” सेशन शुरू किए। Animal Angels Foundation मुंबई भारत की पहली ऐसी संस्था है जो 2003 से ही पेट थेरेपी करवा रही है।

क्या हर कोई पेट थेरेपी ले सकता है?

हाँ, लेकिन इसमें कुछ सावधानियाँ भी हैं। एलर्जी या फोबिया वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है। ट्रेनिंग प्राप्त थेरेपी एनिमल ही अस्पतालों और रिहैब में इस्तेमाल किए जाते हैं। यह दवाइयों का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक चिकित्सा है।

इंडियन जर्नल ऑफ सायकायट्रिस्ट भी कहता है कि पेट थेरेपी को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, क्योंकि यह कम खर्चीली और प्रभावी है। आज की भागदौड़ में जहाँ तनाव, डिप्रेशन और अकेलापन आम हो चुका है, वहाँ हमारे ये चार-पैर वाले साथी सिर्फ़ दोस्त नहीं, बल्कि असली हीलिंग पार्टनर बनकर सामने आ रहे हैं।

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