डीएमके नेता दुरई मुरूगन “ ये तमिलनाडु है बिहार नहीं, यहाँ लोग ज्यादा जागरूक”
चेन्नई/वेल्लोर। तमिलनाडु के वरिष्ठ मंत्री और डीएमके नेता दुरई मुरूगन ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) योजना पर सवाल उठाया है। मुरूगन ने चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की योजना की कड़ी आलोचना करते हुए मंगलवार को वेल्लोर में संवाददाताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, “तमिलनाडु बिहार नहीं है, तमिलनाडु वो राज्य है जहां के लोग जागरूक हैं…ऐसी राजनीति तमिलनाडू के साथ काम नहीं चलेगी । मुरुगन ने कहा है कि राज्य में मतदाता सूची को लेकर इस तरह के प्रयोगों की जरूरत नहीं है।
SIR से होगी बेवजह परेशानी
चुनाव आयोग की यह राष्ट्रव्यापी पहल स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना, नए मतदाताओं को जोड़ना और मौजूद त्रुटियों को सुधारना है। लेकिन डीएमके का तर्क है कि तमिलनाडु में मतदाता सूची पहले से ही अपेक्षाकृत बेहतर है और नागरिकों की भागीदारी अधिक है, ऐसे में इस प्रक्रिया से लोगों को बेवजह परेशान किया जा सकता है।
बिहार से की तुलना
दुरई मुरूगन के बयान के बाद बिहार चर्चा में है, जहाँ SIR लागू होने पर मतदाता सूची से नाम हटाने और विवाद खड़े हुए थे। डीएमके का कहना है कि तमिलनाडु की परिस्थितियाँ अलग हैं और ऐसी स्थिति यहाँ नहीं होनी चाहिए।

पारदर्शिता की मांग
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दुरई मुरूगन ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR लागू करते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और दस्तावेज़ीकरण की जटिलताओं को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गरीब, प्रवासी और पिछड़े मतदाता इस प्रक्रिया में प्रभावित न हों।
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