दिल्ली दंगों के आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे है। इसके अलावा ऐक्टिविस्ट शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा ने भी जमानत के लिए अर्जी दी है। देखिए पूरी खबर
दिल्ली दंगों के आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत न मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर चुके हैं। जानिए दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि और मामले की अहम बातें।
दिल्ली : दिल्ली दंगों के आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे है। उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की है। इसकें अलावा शरजील इमाम और गुलफिशा फातिमा ने भी जमानत के लिए अर्जी दी है।
क्या हुआ था हाई कोर्ट में
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में सुनवाई करते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम सहित सात अन्य — मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अथर खान, मीरान हैदर, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा — की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं।
सुनवाई में उमर खालिद और अन्य की पैरवी कर रहे वकील ने बचाव करते हुए कहा था कि वह पहले ही चार से अधिक साल कस्टडी में रह चुके थे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि इन दंगों का उद्देश्य सिर्फ हिंसा नहीं था, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की साजिश भी इसमें शामिल थी। उन्होंने अदालत में कहा था – “अगर कोई राष्ट्र के खिलाफ काम करेगा, तो बरी होने तक जेल में रहना ही ठीक है।”
हिंसा में हुई थी, 50 से अधिक लोगों की मौत
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस हिंसा में करोड़ों रुपये की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा था। बता दें कि उमर खालिद और अन्य पर दंगों की साजिश रचने का आरोप है, जिसके बाद फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे भड़के। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर दिल्ली दंगों का ‘मास्टरमाइंड’ होने का आरोप लगाया था। इन सभी पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।