बॉलीवुड और समाजसेवा के चर्चित चेहरा सोनू सूद ने ट्वीट कर बिहार में 13 सितंबर को बड़ी घोषणा का ऐलान किया। लोग अटकलें लगा रहे हैं कि वे चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
“जीतेगा बिहार, चमकेगा बिहार” – सोनू सूद का ट्वीट, अब सबकी निगाहें 13 सितंबर पर; सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले माहौल पहले ही काफी गरम हो चुका है। ऐसे में बॉलीवुड अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद के एक छोटे से ट्वीट ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। दरअसल सोनू सूद ने 10 सितंबर 2025 को सोशल मीडिया एप x (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट जिसके बाद बिहार की राजनीति गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या सोनू सूद बिहार चुनाव से राजनीति में एंट्री करेंगे?
सोनू सूद का ट्वीट
10 सितंबर 2025 को सोनू सूद ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा –
“जीतेगा बिहार, चमकेगा बिहार, 13 सितंबर को बड़ी घोषणा करूंगा।”
इस एक लाइन के ट्वीट ने ही चर्चा का तूफान खड़ा कर दिया है। लोग यह अंदाज़ा लगाने लगे कि आखिर सोनू सूद बिहार की राजनीति में क्या भूमिका निभाने जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
सोनू सूद के इस संदेश के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि सोनू सूद जन सुराज पार्टी से जुड़ सकते हैं।कुछ लोगों को लगता है कि वे INDIA गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं, कई लोगों का कहना है कि सोनू सूद खुद एक नई राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं और सीधे चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
हालांकि, अभी तक उन्होंने साफ-साफ नहीं बताया कि उनका ऐलान किस बारे में होगा। यही वजह है कि सबकी नज़रें 13 सितंबर की उनकी घोषणा पर टिकी हुई हैं।
क्यों है सोनू सूद का नाम खास ?
सोनू सूद ने फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएँ निभाकर पहचान बनाई, लेकिन असली लोकप्रियता उन्हें कोरोना काल के दौरान मिली। जब उस समय लाखों प्रवासी मजदूर मुश्किल में थे, सोनू सूद ने न केवल उन्हें घर पहुँचाने की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि आर्थिक और सामाजिक मदद भी की। इसके बाद से उन्हें “गरीबों का मसीहा” कहा जाने लगा।
यही कारण है कि राजनीति में उनके आने की चर्चा आम जनता के बीच तुरंत असर डाल रही है। खासकर युवा और मजदूर वर्ग उन्हें एक भरोसेमंद चेहरा मानते हैं।

बिहार की सियासत पर असर
बिहार की राजनीति ज़्यादातर जातियों और गठबंधनों पर टिकी रहती है। यहां एनडीए और महागठबंधन आमने-सामने हैं। इनके बीच प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
अगर सोनू सूद राजनीति में उतरते हैं, तो यह निश्चित तौर पर इन सभी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वे जातीय राजनीति से अलग एक “विकास और मानवता” का चेहरा लेकर आ सकते हैं, जिससे युवा और शहरी मतदाता प्रभावित हो सकते हैं।
13 सितंबर पर सबकी नज़रें
अब सभी राजनीतिक दल और जनता 13 सितंबर का इंतजार कर रही है। सोनू सूद यह बताएंगे कि वे चुनावी मैदान में उतरेंगे या किसी दल के साथ खड़े होंगे, या फिर केवल सामाजिक पहल की कोई नई योजना सामने लाएँगे।
एक ट्वीट ने बिहार की राजनीति में बड़ी हलचल मचा दी है। सोनू सूद जैसे लोकप्रिय और भरोसेमंद चेहरे का नाम आते ही चर्चाएँ और अटकलें तेज हो गई हैं। अब सबकी नज़र 13 सितंबर पर है, जब साफ होगा कि बिहार का चुनावी खेल कितना बदल सकता है। या यह ऐलान कुछ और है |