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आज नेपाल के लिए ब्लैक डे ,नेपाल की बेटी मनीषा कोइराला का इमोशनल पोस्ट  

अभिनेत्री बोलीं—“आज नेपाल के लिए ब्लैक डे है। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन ने देश को हिंसा में झोंका

नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में 19 लोगों की मौत के बाद मनीषा कोइराला ने इसे “ब्लैक डे” करार दिया। बॉलीवुड अभिनेत्री ने हिंसा की निंदा करते हुए जनता की आवाज़ की अहमियत बताई।

पड़ोसी देश नेपाल इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक अशांति से जूझ रहा है। वहीं भड़के जन आंदोलन और हिंसा ने देश को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सौ से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। इस उथल-पुथल के बीच नेपाली मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने इसे “देश के लिए एक काला दिन” करार देते हुए हिंसा की निंदा की है।

सोशल मीडिया बैन से उपजा आंदोलन

सितंबर 2025 की शुरुआत में नेपाल सरकार ने में फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर (X) और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया था। सरकार का तर्क था कि यह बैन अफवाहों और गलत सूचनाओं पर रोक लगाने के लिए है। लेकिन इस कदम ने युवाओं और आम जनता के बीच गुस्सा भड़का दिया।

नेपाल की नई पीढ़ी, जिसे Gen Z कहा जाता है, सड़कों पर उतर आई है। इन प्रदर्शनों ने जल्द ही उग्र रूप ले लिया। पुलिस की सख्त कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हुए। हालात बिगड़ने पर कर्फ्यू लागू करना पड़ा और सरकार को सोशल मीडिया बैन हटाने की घोषणा करनी पड़ी।

प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा और जांच समिति

लगातार बढ़ते दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवज़ा, घायलों को मुफ्त इलाज और 15 दिन में रिपोर्ट देने वाली जांच समिति गठित करने का वादा किया है।

मनीषा कोइराला का भावुक बयान

बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री और नेपाल की बेटी मानी जाने वाली मनीषा कोइराला ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखते हुए कहा कि यह “नेपाल के लिए काला दिन” है। मनीषा के इस बयान ने कई लोगों का दिल छू लिया। उन्होंने न केवल नेपाल के युवाओं के दुख को आवाज़ दी बल्कि दुनिया को यह भी याद दिलाया कि लोकतंत्र की ताक़त जनता की आवाज़ में छिपी होती है। मनीषा ने अपने पोस्ट में एक खून से सने जूते की तस्वीर भी साझा की, जिसने इस त्रासदी की भयावहता को और गहरा कर दिया।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने भी नेपाल की घटनाओं पर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह हालात पर बारीकी से नज़र रख रहा है और भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी। साथ ही, मारे गए युवाओं के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया बैन का विरोध नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और शासन के तौर-तरीकों से उपजे गुस्से की आवाज़ भी है। नेपाल में फैली हिंसा और असंतोष ने देश को एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। मनीषा कोइराला का बयान केवल एक सेलिब्रिटी की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अपील है।

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