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नेपाल के बाद फ्रांस में धधकी प्रदर्शनों की आग, पीएम के इस्तीफ़े के बाद भी लाखों लोग सड़कों पर

फ्रांस में बजट कटौती से नाराज़ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए है

फ्रांस में बजट कटौती से नाराज़ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए है। पीएम के इस्तीफ़े के बावजूद लोग सरकार से नाराज़ है। पढ़िए पूरी खबर

पेरिस सहित कई शहरों में गिरफ्तारी हुई। एक साल में चौथे प्रधानमंत्री की नियुक्ति भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं कर सकी।

 

अभी नेपाल का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा है और एक यूरोपीय देश में दूसरी आग भड़क  गई है। फ्रांस में सरकार के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन शुरू हो गया है। फ्रांस में क्रांति की ज्वाला भड़का रहा है बजट।  यह प्रदर्शन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो और फ्रांस की सरकार के खिलाफ किया जा रहा है। बजट में कटौती इस विरोध प्रदर्शन का सबसे प्रमुख कारण है।

फ्रांस में बजट कटौती से नाराज़ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए है
फ्रांस में बजट कटौती से नाराज़ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए है

सड़कों पर जमा लाखों प्रदर्शनकारी

दैनिक भास्कर की एक खबर के मुताबिक बुधवार को लगभग 1 लाख प्रदर्शनकारी फ्रांस की सड़कों पर उतर आए हैं। पूरे देश में लगभग 200 लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई  है।  अकेले पेरिस में 132 लोगों की गिरफ्तारियां की गई है। इन प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो अपने पद से इस्तीफा दे और सरकार बजट में कटौती के प्रस्ताव को वापस ले। सरकार विरोधी  इस प्रदर्शन  को कुछ वामपंथी पार्टियों समर्थन दे रही है। इनके द्वारा ब्लॉक एवरीथिंग मतलब सब कुछ रोक दो इस प्रकार का आंदोलन चला रही है।

एक साल में बदले चार प्रधानमंत्री

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो  ने सेबास्टियन लेकोर्नू को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया है। लेकोर्नू इससे पहले देश के रक्षा मंत्री का पद संभाल रहे थे। इससे पहले बढ़ते दबाव के चलते फ्रांस्वा बायरू को इस्तीफ़ा देना पड़ा है। फ्रांस पिछले 1 साल से अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।  एक साल में प्रधानमंत्री बदलने का यह चौथा मामला है।

क्यों की जा रही है बजट में कटौती

फ्रांस की सरकार का कहना है कि  सरकार पर कर्ज बढ़ते जा रहा है इस वक्त देश पर जीडीपी का 113 प्रतिशत कर्ज हो गया है। इसी को ध्यान रखते हुए सरकार बजट में कटौती कर रही है। बजट में लगभग 4 लाख करोड़ की कटौती की गई है। वहीं विरोधियों का कहना है कि सरकार के इस फैसले की वजह से बड़े स्तर पर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कटौती हो रही है। इसके साथ ही  पेंशन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

 

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