Fact Check
Search

वेनिस फिल्म फेस्टिवल 2025 में भारत की बेटी की ऐतिहासिक और प्रेरक जीत – अनुपर्णा रॉय ने रचा गौरवपूर्ण इतिहास

82वें वेनिस फिल्म फेस्टिवल में Songs of Forgotten Trees को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सम्मान मिला। इसी के साथ, अनुपर्णा रॉय इस खिताब को जीतने वाली पहली भारतीय निर्देशिका बन गई हैं ।

कभी आपने सोचा है कि छोटे-से कस्बे की गलियों से निकलकर कोई लड़की दुनिया के सबसे बड़े फिल्मी मंच पर इतिहास रच देगी? वेनिस फिल्म फेस्टिवल 2025 ने इस सवाल का जवाब दे दिया है। अनुपर्णा रॉय ने अपनी फ़िल्म Songs of Forgotten Trees से न सिर्फ दर्शकों का दिल जीत लिया, बल्कि पहली भारतीय महिला निर्देशिका बनकर बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड को अपने नाम किया। यह पल सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के लिए एक गौरव और गर्व की बात है। वेनिस फिल्म फेस्टिवल

ऐतिहासिक उपलब्धि

82वें वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (27 अगस्त – 6 सितंबर 2025) में “Horizons” सेक्शन में Songs of Forgotten Trees को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सम्मान मिला। इसी के साथ, अनुपर्णा रॉय इस खिताब को जीतने वाली पहली भारतीय निर्देशिका बन गई हैं। यह फिल्म इस साल इस प्रतिष्ठित सेक्शन में चयनित इकलौती भारतीय फिल्म भी थी।

फिल्म का सफर—विदेशी मंच से गांव की कहानी तक

सॉन्ग्स ऑफ फॉरगॉटन ट्रीज, दो मुंबई की प्रवासी महिलाओं — थूया और स्वेता — की ज़िंदगी में दुख, संवादहीनता और आखिरकार जुड़ाव की मजबूत कहानी को दर्शाता है। यह कहानी अनुपर्णा की खुद की जीवन की यादों और अनुभवों से जुड़ी है। उनकी दोस्त झुम्मा के बचपन की यादें, और समाज में महिलाओं की अनदेखी कहानियाँ सभी इसमें बुनें गए हैं। फ़िल्म ने वर्ल्ड प्रीमियर, वेनिस में किया जहां दर्शकों ने इसे स्टैंडिंग ओवेशन देकर दिया।वेनिस फिल्म फेस्टिवल

वेनिस फिल्म फेस्टिवल

थिएटर से मंच तक

पुरस्क़ार समारोह में अनुपर्णा रॉय ने सफेद साड़ी में स्टेज पर आकर यह महसूस कराया कि यह पल उनके लिए कितना भावनात्मक था। उन्होंने उस फिल्म को जीवन देने वाले सभी सहयोगियों, जिनमें अनुराग कश्यप, निर्माता दल, कास्ट और क्रू शामिल हैं उनका तहेदिल से धन्यवाद किया।

परिवार से प्रेरणा और स्थानीय ग्रामीण पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल के कुल्टी और नारायणपुर की मध्य-वर्गीय पृष्ठभूमि से आने वाली अनुपर्णा रॉय की इस उपलब्धि ने उनके परिवार में खुशी के साथ-साथ गर्व और भावनाओं को भी जगाया है। उनके पिता ब्रह्मानंद रॉय कहते हैं कि जब अनुपर्णा ने नौकरी छोड़कर फ़िल्म बनाने का फैसला किया था, तो उन्हें चिंता थी लेकिन अब यह सम्मान उनकी सारी चिंता मिटा गया है।

क्रू में शामिल शाक्यदेव चौधरी (द्वितीय यूनिट डीओपी) ने बताया कि अनुपर्णा ने सिनेमा की साधारण भाषा को चुना — लंबे-लंबे शॉट्स, न्यूनतम एडिटिंग, बिना कट-इन के दृश्यों को जीने देना।

यह उन सीमाओं के भीतर भी नयी सौंदर्य भाषा तलाशने जैसी शख्सियत थी, जिसने दर्शकों और आलोचकों दोनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वास्तव में, उन्होंने ऐसा फिल्म-निर्माण चुना जो बस देखने के लिए नहीं, बल्कि महसूस हो — मौन, अंतरंगता, और हाशिए पर जीने वाले स्त्रियों की जुड़ी सच्ची कहानियाँ हैं।वेनिस फिल्म फेस्टिवल

अनुपर्णा के इस सफर से प्रेरणा लेते हुए, नई युवा निर्देशिकाएँ अपनी जुबान और दुनिया बयान कर रही हैं। अनुपर्णा ने कहा—“यह फिल्म उन हर उस महिला को श्रद्धांजलि है, जिन्हें चुप कराया गया, अनदेखा किया गया या कम आँका गया। यह जीत नई आवाज़ों, नई कहानियों, और महिलाओं की सशक्त कहानी बयाँ करने की प्रेरणा हो।”वेनिस फिल्म फेस्टिवल

 

 

 

जाने ऐसा क्या हुआ कि कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा को छोड़नी पड़ गई RPSC की सदस्यता!

एशिया कप से पहले धमाका: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को t20 मुकाबले में दी मात

लिट्टी-चोखा से ठेकुआ तक: जाने क्यों ख़ास है बिहार की देसी थाली?

राजबल्लभ यादव ने तेजस्वी यादव की पत्नी को‘जर्सी गाय’ कहा, राजद कार्यक र्ताओं ने जलाया पुतला

जोधपुर में RSS का ‘मन्थन शिविर’,भाजपा संगठन में बदलाव पर चर्चा की संभावना

लिस्बन हादसा: Gloria Funicular ट्रेन बिल्डिंग से टकराई, 15 की मौत, 18 घायल

admin

Hi I am admin

Leave a Comment

Your email address will not be published.