मोहम्मद रफ़ी के बेटे शाहिद रफ़ी बोले – लता और आशा ने पिता के करियर को नुकसान पहुंचाया
मोहम्मद रफ़ी के बेटे शाहिद रफ़ी ने लता मंगेशकर और आशा भोंसले पर एक बड़ा बयान दिया है शाहिद ने लता मंगेशकर और आशा भोंसले पर उनके पिता मोहम्मद रफ़ी के करियर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है
एनडीटीवी की एक खबर अनुसार मोहम्मद रफ़ी के पुत्र शाहिद रफ़ी ने हालिया इंटरव्यू में लता मंगेशकर और उनकी बहन आशा भोंसले पर अपने पिता के करियर को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दोनों को ईर्ष्यालु और इनसिक्योर करार देते हुए कहा कि उन्होंने रफ़ी साहब की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की।
एनडीटीवी के अनुसार शाहिद ने दावा किया कि जब उनके पिता को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड सम्मान मिलने वाला था, तब लता मंगेशकर ने हस्तक्षेप किया और अंतिम क्षण में पुरस्कार उन्हीं के नाम दर्ज हो गया, बावजूद इसके मोहम्मद रफ़ी ने मामले को आगे बढ़ाने से परहेज किया। यह बयान शाहिद ने मीडिया से बातचीत में दिया।
उन्होंने बताया कि उस दौर में कई गायकों के बीच प्रतिस्पर्धा थी और कुछ कलाकार ये नहीं चाहते थे कि रफ़ी नंबर वन कहलाएं। शाहिद ने कहा, “People were calling him number one, and they didn’t like that” और यह आरोप लगाया कि कई बार उनके पिता को करियर के मोड़ पर रोक गया।
एनडीटीवी के अनुसार, गायक आशा भोंसले पर शाहिद का गुस्सा खासा तेज़ था। उन्होंने कहा, “आप एक पढ़ी लिखी व्यक्ति हैं; थोड़ा शर्म करें। अपनी उम्र का लिहाज रखे अपने बारे में बात करें। इस उम्र में ऐसा नहीं करना चाहिए।”
“ऊपर वाला बैठा है, मेरे बाप के बारे में कोई कुछ बोलेगा तो मेरे से बर्दाश्त नहीं होता।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने एक बार लता जी से भी अपनी आपत्ति व्यक्त की थी और अपनी नाराजगी जताई थी। साथ ही उन्होंने इस बात पे भी जोर दिया कि उनके पिता ओर किशोर कुमार के बीच निजी दुश्मनी की अफवाहें निराधार हैं, उन्होंने कहा कि उन दोनों के रिश्ते प्रोफेशनल और पर्सनल लेवल पर हमेशा अलग रहे।

1950 से 1970 के समय में बॉलीवुड सिंगर्स के बीच काफी प्रतिस्पर्धा लगी रहती थी और कई दफा ऐसा भी होता था के गायकों को उनका हक़ अदा नहीं किया जाता था। मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर और आशा भोंसले तीनों ने कई हिट गाने दिए और अक्सर उनके बीच प्रोफेशनल कंपटीशन सामने आए पर शाहिद के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। गायक मोहम्मद रफ़ी का निधन 1980 में हुआ था और वे 55 वर्ष के थे। उनकी आवाज भारतीय सीने-म्यूज़िक के गोल्डन पीरियड की पहचान रही है।