मोबाइल से दूरी से लेकर एक लाइन जर्नलिंग तक—छोटे बदलाव कैसे बड़ी राहत ला सकते हैं, जानिए..
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में मानसिक शांति बनाए रखना आसान नहीं रह गया है। काम की बढ़ती ज़िम्मेदारियाँ, रिश्तों में तनाव, सोशल मीडिया का दबाव और असंतुलित जीवनशैली — ये सभी कारण मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि संसद में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा पेश हालिया आंकड़ों में बताया गया कि भारत की लगभग 18% आबादी किसी न किसी रूप में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रही है।
मानसिक स्वास्थ्य पर चिंताजनक आँकड़े
नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे (2015-16) के अनुसार, भारत में 10.6% वयस्क किसी मानसिक विकार से प्रभावित पाए गए। जीवनकाल (lifetime prevalence) में यह संख्या बढ़कर 13.7% तक पहुँच जाती है।हर छठा वयस्क (करीब 15%) ऐसा है, जिसे चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। शहरी क्षेत्रों में मानसिक रोगों की प्रचलन दर 13.5%, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 6.9% दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय है। लेकिन राहत की बात यह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि हमारे दिन भर की छोटी- छोटी आदतें भी हमारे मन और जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।
अगर आप दिनचर्या में कुछ सरल उपाय करे तो तनाव नियंत्रित किया जा सकता है और मानसिक संतुलन भी बनाए रखा जा सकता है।
1.सुबह की शुरुआत मोबाइल से दूर
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों मानना हैं कि सुबह उठते ही मोबाइल देखने की आदत तनाव को बढ़ा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिन की शुरुआत पहले 30 मिनट तक फोन से दूर रहकर करने से मन को शांति मिलती है और विचारों को व्यवस्थित करने का समय मिलता है। इस समय गहरी साँसें लेना, हल्का व्यायाम करना या सिर्फ चुपचाप बैठना तनाव कम करने में काफ़ी मददगार साबित होती हैं।
2. तनाव की स्थिति में गहरी साँसें
जब कभी भी आपको गुस्सा या तनाव आ जाए तो तुरंत प्रतिक्रिया करने के बजाय, यदि व्यक्ति गहरी साँसें ले तो उसका प्रभाव मानसिक शांति पर सकारात्मक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तंत्रिका तंत्र (nervous system) को संतुलित करता है और सोच-समझकर निर्णय लेने में बहुत सहायक होता है। नियंत्रित श्वास (breathing exercises) चिंता और अवसाद को कम करने में भी लाभदायक मानी जाती हैं।
3. साफ वातावरण मे रहें
अगर हम दैनिक आधार पर एक छोटी जगह — जैसे एक दराज, शेल्फ या टेबल — को व्यवस्थित करे तो मानसिक राहत महसूस होती है। देखा जाए तो, साफ-सुथरा वातावरण ही हमारे दिमाग को यह संदेश देता है कि “मैं सुरक्षित हूँ” और यह मानसिक शांति की भावना को मज़बूत करता है।
4. जर्नलिंग की आदत
अपनी भावनाओं को लिखना एक अच्छी आदत होती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति केवल एक लाइन लिखे — जैसे कि “आज खुद पर गर्व हुआ” या “आज थकान ज़्यादा हो रही” — बस इतना ही लिखना हमारे अंदर की सेल्फ अवेयरनेस बढ़ाता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि नियमित जर्नलिंग करने वाले लोगों की नींद की गुणवत्ता औरों की तुलना में बेहतर होती है और उनका मानसिक स्वास्थ्य समय के साथ संतुलित रहता है।
5. प्रकृति के साथ समय बिताएँ
रोज़ाना कुछ समय प्रकृति के साथ गुजारना मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए बहुत जरूरी है। दिन के सिर्फ 10 मिनट स्क्रीन से दूर बाहर बैठना, पेड़ों के बीच घूमना या छत पर खुले आसमान को देखना भी तनाव को कम करता है और मन को ताजगी प्रदान करता है। प्राकृतिक वातावरण में समय गुजारने से तनाव हार्मोन (cortisol) का स्तर कम होता है और मानसिक कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।