‘लौंडा नाच’ क्यों खो रहा है अपनी पहचान! जानिए 19वीं सदी में क्यों हुआ ‘लौंडा नाच’ का जन्म ?
भिखारी ठाकुर के शब्द – “हम नाचते नहीं, हम समाज को आईना दिखाते हैं।” कभी कला का उत्सव था – ‘लौंडा नाच’ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं…
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घर-घर में होगी रोशनी की बरसात, जानिए मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व ! दिवाली 2025: जगमगाते दीप, खुशियों से भरे चेहरे…
भारतीय परंपरा में बांस को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। जानें क्यों बांस को जलाना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से वर्जित है और इसके पीछे छिपा…