‘लौंडा नाच’ क्यों खो रहा है अपनी पहचान! जानिए 19वीं सदी में क्यों हुआ ‘लौंडा नाच’ का जन्म ?
भिखारी ठाकुर के शब्द – “हम नाचते नहीं, हम समाज को आईना दिखाते हैं।” कभी कला का उत्सव था – ‘लौंडा नाच’ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं…
भिखारी ठाकुर के शब्द – “हम नाचते नहीं, हम समाज को आईना दिखाते हैं।” कभी कला का उत्सव था – ‘लौंडा नाच’ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक परंपराओं…
52 बूटी शिल्प – संस्कृति और पारंपरिक कलाओं के लिए जाना जाता हैं । विलुप्त हो रही थी इस कला की वापसी की कहानी आज हर भारतीय को जाननी चाहिए…