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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: सहारनपुर की देवबंद सीट पर किसका रहेगा दबदबा? भाजपा का किला बचेगा या सपा करेगी वापसी?

देवबंद विधानसभा चुनाव 2027: 2012 में सपा, 2016 के उपचुनाव में कांग्रेस, 2017 और 2022 में भाजपा की जीत, अब किसके पक्ष में जाएगा जनादेश?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और अहम सीटों में शामिल देवबंद विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। बड़ी मुस्लिम आबादी, धार्मिक महत्व और जटिल सामाजिक समीकरणों के कारण यह सीट प्रदेश की राजनीति में विशेष महत्व रखती है।

सहारनपुर जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं—

1. बेहट
2. नकुड़
3. सहारनपुर नगर
4. सहारनपुर
5. देवबंद
6. रामपुर मनिहारान
7. गंगोह

इन सभी सीटों में देवबंद विधानसभा सीट को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से यह सीट हमेशा सुर्खियों में रहती है। यहां के चुनाव में अक्सर भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है।

पिछले विधानसभा चुनावों का प्रदर्शन

2012: समाजवादी पार्टी ने दर्ज की जीत

2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र सिंह राणा ने देवबंद विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। उन्हें 66,682 वोट मिले थे, जबकि बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार मनोज चौधरी को 63,632 वोट प्राप्त हुए थे। इस जीत के साथ सपा ने देवबंद सीट पर अपना कब्जा स्थापित किया था।

2016: उपचुनाव में कांग्रेस की जीत

2016 में समाजवादी पार्टी के विधायक राजेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद देवबंद विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया। इस उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार माविया अली ने जीत दर्ज की। उन्हें 51,012 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार मीना राणा को 47,453 वोट प्राप्त हुए। इस जीत ने देवबंद में कांग्रेस को नई राजनीतिक ताकत प्रदान की।

2017: भाजपा ने बदला समीकरण

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार बृजेश सिंह ने जीत दर्ज की। उन्हें 1,02,244 वोट मिले, जबकि बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार माजिद अली को 72,844 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ भाजपा ने देवबंद में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

2022: भाजपा ने बरकरार रखा दबदबा

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार बृजेश सिंह ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कार्तिकेय राणा को हराकर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। बृजेश सिंह को 93,890 वोट मिले, जबकि कार्तिकेय राणा को 86,786 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ भाजपा ने देवबंद सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी।

क्या कहते हैं पिछले चुनावों के आंकड़े?

पिछले चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि देवबंद विधानसभा सीट पर मतदाताओं का रुझान समय-समय पर बदलता रहा है।

– 2012 में मतदाताओं ने समाजवादी पार्टी पर भरोसा जताया।
– 2016 के उपचुनाव में कांग्रेस को समर्थन मिला।
– 2017 में मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर गया।
– 2022 में भाजपा ने अपनी जीत दोहराई।

इन नतीजों से साफ है कि देवबंद के मतदाता स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक परिस्थितियों, सामाजिक समीकरणों और उम्मीदवारों की छवि को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं।

जातीय और सामाजिक समीकरण

देवबंद विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा दलित, गुर्जर, जाट, पिछड़ा वर्ग और सवर्ण मतदाता भी इस सीट के चुनावी समीकरण में अहम भूमिका निभाते हैं।

समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बसपा परंपरागत रूप से मुस्लिम और अन्य सामाजिक वर्गों के समर्थन को अपने पक्ष में करने का प्रयास करती रही हैं, जबकि भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ अन्य वर्गों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम करती है। ऐसे में सामाजिक समीकरण 2027 के चुनाव में भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

2027: किसके लिए चुनौती, किसके लिए अवसर?

भाजपा

2017 और 2022 में जीत दर्ज करने के बाद भाजपा के सामने अपनी बढ़त को बरकरार रखने की चुनौती होगी। पार्टी को विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ नए मतदाताओं तक पहुंच बनानी होगी।

कांग्रेस

2016 के उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बावजूद कांग्रेस 2017 और 2022 में अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर सकी। 2027 में वापसी के लिए पार्टी को संगठन मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देने और अपने पारंपरिक जनाधार को फिर से सक्रिय करना होगा।

समाजवादी पार्टी और अन्य दल

समाजवादी पार्टी के लिए 2012 जैसी सफलता को दोहराना आसान नहीं होगा। यदि पार्टी मजबूत उम्मीदवार और प्रभावी सामाजिक समीकरणों के साथ चुनाव मैदान में उतरती है, तो मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। वहीं, बसपा और अन्य दल भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या होगा 2027 का जनादेश?

हालांकि विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन देवबंद सीट पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। आने वाले चुनाव में भाजपा के सामने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी, जबकि विपक्षी दल नए राजनीतिक समीकरण तैयार करने की कोशिश करेंगे।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि देवबंद की जनता विकास, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर 2027 में किसे अपना समर्थन देती है।

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