ब्रज की राजनीति का बड़ा केंद्र मथुरा, 2027 में किसका पलड़ा रहेगा भारी?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में ब्रज क्षेत्र का राजनीतिक केंद्र मथुरा एक बार फिर चर्चा में है। धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मथुरा जिले की पांच विधानसभा सीटों पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। सवाल यह है कि क्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी मजबूत पकड़ बनाए रख पाएगी या विपक्ष वापसी करने में सफल होगा?
मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां धर्म, आस्था और राजनीति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि मथुरा की राजनीति हमेशा प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभाती रही है।
मथुरा जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं—
1. छाता विधानसभा सीट (81)
2. मांट विधानसभा सीट (82)
3. गोवर्धन विधानसभा सीट (83)
4. मथुरा विधानसभा सीट (84)
5. बलदेव विधानसभा सीट (85)
इन सभी सीटों का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विशेष महत्व है। जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों प्रकार के मतदाता हैं, जहां विकास, पर्यटन, रोजगार, कृषि और स्थानीय मुद्दे चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं।
पिछले तीन चुनावों का प्रदर्शन
2012: कांग्रेस के खाते में गई मथुरा सीट
2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप माथुर ने मथुरा विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। उन्हें 54,498 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी देवेंद्र कुमार शर्मा को 53,997 वोट प्राप्त हुए थे। इस जीत के साथ कांग्रेस ने मथुरा सीट पर कब्जा जमाया था।
2017: भाजपा की बड़ी जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार श्रीकांत शर्मा ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 1,43,361 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप माथुर को 42,200 वोट प्राप्त हुए। इस जीत ने मथुरा में भाजपा की स्थिति को और मजबूत किया।
2022: भाजपा ने बरकरार रखी जीत की लय
2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार श्रीकांत शर्मा ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें 1,58,859 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के प्रदीप माथुर को 49,056 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ भाजपा ने मथुरा सीट पर अपना वर्चस्व कायम रखा।
क्या कहते हैं पिछले चुनावों के आंकड़े?
पिछले तीन चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि मथुरा विधानसभा सीट पर मतदाताओं का रुझान समय के साथ बदलता रहा है।
– 2012 में मतदाताओं ने कांग्रेस पर भरोसा जताया।
– 2017 में भाजपा के पक्ष में बड़ा जनादेश देखने को मिला।
– 2022 में भी भाजपा ने अपनी जीत दोहराई।
इससे यह साफ है कि मथुरा में मतदाता स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक परिस्थितियों और उम्मीदवारों की छवि के आधार पर अपना निर्णय लेते हैं।
2027: किसके लिए चुनौती, किसके लिए अवसर?
भाजपा
लगातार दो चुनाव जीतने के बाद भाजपा के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी। पार्टी विकास कार्यों, धार्मिक पर्यटन, बुनियादी ढांचे और ब्रज क्षेत्र के विकास को प्रमुख मुद्दा बना सकती है।
कांग्रेस
कांग्रेस के लिए 2012 जैसी सफलता दोहराना आसान नहीं होगा। पार्टी को मजबूत संगठन, प्रभावी नेतृत्व और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच विश्वास कायम करना होगा।
समाजवादी पार्टी और अन्य दल
समाजवादी पार्टी तथा अन्य विपक्षी दल यदि मजबूत उम्मीदवारों और प्रभावी सामाजिक समीकरणों के साथ चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो मुकाबला रोचक हो सकता है।
क्या होगा 2027 का जनादेश?
हालांकि चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने लगी है। मथुरा की जनता विकास, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अपना फैसला करेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 में भाजपा अपनी बढ़त बरकरार रख पाती है या विपक्ष वापसी करने में सफल होता है।