अल नीनो ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत ! क्या देश में आने वाला है बड़ा संकट
सामान्य से 38% कम बारिश, किसान इंतजार में; कई राज्यों में गर्मी और उमस से लोग परेशान

मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस वर्ष मानसून की रफ्तार सामान्य से धीमी बनी हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में अपेक्षित ‘लो प्रेशर सिस्टम’ का विकसित न होना और एल नीनो का प्रभाव मानसून की प्रगति में बाधा बन रहा है। इसी कारण देश के कई हिस्सों में मानसून के अनुकूल परिस्थितियां बनने में विलंब हो रहा है।
देशभर में अलग-अलग मौसम का असर
देशभर में मौसम का मिजाज अलग-अलग देखने को मिल रहा है। एक ओर असम, मेघालय, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में हीट वेव जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून के फिर से सक्रिय होने के साथ स्थिति में सुधार होगा और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
मध्य भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
हालांकि मध्य भारत में अभी भी मानसून की सुस्त चाल चिंता का विषय बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच देश में सामान्य से 38 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक असर मध्य भारत पर देखा गया, जहां बारिश में 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
हालांकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सामान्य से 3 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मानसून के कारण नहीं हुई। इसके पीछे पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) प्रमुख कारण रहा। जून महीने में पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियां पांच बार दर्ज की गईं, जिसके कारण इन क्षेत्रों में वर्षा हुई। इसके अलावा शुष्क हवाओं का प्रभाव भी मौसम की परिस्थितियों को प्रभावित करता रहा।
क्या है एल नीनो और कब बनती है यह स्थिति?
मौसम वैज्ञानिक मानसून में देरी के पीछे एल नीनो को भी एक महत्वपूर्ण कारण मान रहे हैं। एल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। यह स्थिति तब बनती है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतही तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। समुद्र के तापमान में यह वृद्धि वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है।
भारत के मानसून पर कैसे पड़ता है असर?
एल नीनो का प्रभाव दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका असर विशेष रूप से मानसून पर देखा जाता है। एल नीनो की स्थिति बनने पर मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे वर्षा की मात्रा सामान्य से कम रहने की संभावना बढ़ जाती है। कई बार इसके कारण मानसून की प्रगति धीमी हो जाती है और वर्षा का वितरण भी प्रभावित होता है।
किसानों की बढ़ रही चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मानसून की रफ्तार धीमी रहने और कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी के पीछे एल नीनो सहित अन्य मौसमीय परिस्थितियों की भी भूमिका रही है। मानसून के समय पर नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खेती का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर करता है। यदि बारिश में अधिक देरी होती है तो बोवनी का समय प्रभावित हो सकता है, जिसका असर कृषि कार्यों पर पड़ने की आशंका है।
फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में लोग मानसून के आगमन का इंतजार कर रहे हैं। गर्मी, तपन और उमस से राहत के लिए सभी की निगाहें आने वाली बारिश पर टिकी हुई हैं।