कर्णप्रयाग विवाद के बाद प्रशासन सख्त, 27 जून तक धारा 163 लागू; नगरासू गुरुद्वारे में भी बढ़ाई गई सुरक्षा

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद का मामला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। चमोली जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में अब भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। गुरुद्वारे में 4 निहंग डेरा जमाकर बैठे हुए हैं। ये शनिवार से वहां जमे हुए हैं, जिससे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द और बढ़ गया है। हालांकि निहंगों ने बंधकों को छोड़ दिया है।
स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर है। आईटीबीपी के जवानों की भी तैनाती हालात को संभालने के लिए की गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी है, ताकि माहौल खराब होने से रोका जा सके। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
प्रशासन सख्त, धारा 163 के तहत कई गतिविधियों पर रोक
कर्णप्रयाग में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। धारा 163 लागू होने के बाद अब पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने, जुलूस निकालने, धरना-प्रदर्शन करने और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक रहेगी।
इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि-विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन ने लाठी, तलवार, चाकू जैसे हथियारों के साथ-साथ ज्वलनशील सामग्री और किसी भी खतरनाक वस्तु को लेकर चलने पर रोक लगा दी है।
वहीं, पत्थरबाजी या किसी भी तरह की हिंसक गतिविधि के लिए सामग्री जुटाने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक टिप्पणी, नारेबाजी या माहौल खराब करने वाली जानकारी सोशल मीडिया समेत किसी भी माध्यम से फैलाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
निहंगों ने रखीं तीन मांगें
विवाद की जड़ कर्णप्रयाग बाजार में 16 जून को हुई घटना से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे सिख यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के बीच विवाद हो गया था।
देखते ही देखते मामला कहासुनी से मारपीट तक पहुंच गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि विवाद के दौरान धारदार हथियार भी निकाले गए। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से तीन को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि एक आरोपी का इलाज चल रहा है। घटना के बाद निहंग सिखों की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई की है।
इसी को लेकर उन्होंने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
पहली मांग में निहंगों ने आरोप लगाया कि पुलिस को स्थानीय लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए।
दूसरी मांग है कि गिरफ्तार साथियों को जल्द रिहा किया जाए और हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वहीं तीसरी मांग में चमोली पुलिस द्वारा दर्ज मामले की एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है।
निहंग सिख कौन हैं? हथियार रखने को लेकर क्यों उठते हैं सवाल
निहंग सिखों की पहचान सिख परंपरा में एक अलग स्थान रखती है। अपने पारंपरिक पहनावे, नीली पोशाक और शस्त्र रखने की परंपरा के कारण वे अक्सर चर्चा में रहते हैं।
निहंग सिखों का इतिहास सिख योद्धा परंपरा से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह के समय में खालसा पंथ की स्थापना के बाद योद्धा परंपराओं को मजबूती मिली। निहंग सिख इसी परंपरा का हिस्सा माने जाते हैं, जिनका उद्देश्य धार्मिक मूल्यों और समुदाय की रक्षा से जुड़ा रहा है।
निहंग सिखों के पास पारंपरिक शस्त्र रखने की परंपरा रही है, जिसमें तलवार जैसे हथियार शामिल हैं। हालांकि, समय-समय पर सार्वजनिक स्थानों पर इन हथियारों के प्रदर्शन को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं। कई बार प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच यही मुद्दा तनाव का कारण बन जाता है।
