नो न्यूक्लियर बॉम्ब’ पर ईरान हुआ तैयार! 19 जून क्यों टिकी है दुनिया की नजरे ?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग अब खत्म होती दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों देशों के बीच सहमति बन गई है। ट्रंप ने यह भी बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द खोला जा सकता है। ईरान ने भी एमओयू को अंतिम रूप देने की बात कही है। 19 जून को दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता स्विट्ज़रलैंड में हो सकता है।
19 जून पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
19 जून पर इस समय पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा है कि जेनेवा में दोनों देशों के बीच पीस डील पर बात होगी । जिसमें “नो न्यूक्लियर बॉम्ब” समझौते समेत कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
ईरान-अमेरिका समझौते में क्या शामिल होगा ?
• ईरान इस बात के लिए राजी हो गया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही खरीदेगा।
• ईरान तुरंत सभी जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को खोलेगा।
• अमेरिका नाकेबंदी को तुरंत हटाना शुरू करेगा।
• ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।
• ईरानी तेल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
• अमेरिका 25 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति छोड़ेगा।
जिनेवा में समझौते पर होंगे हस्ताक्षर, ट्रंप भी हो सकते हैं शामिल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कहा कि वह इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए शुक्रवार को जेनेवा जाएंगे। इस मौके पर राष्ट्रपति ट्रंप भी शामिल हो सकते हैं।
अमेरिका-ईरान डील हुई तो क्या होंगे बड़े बदलाव?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है, तो इसका असर सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल और पेट्रोलियम पदार्थों में लगी आग इस वक्त पूरी दुनिया को पहले ही महंगाई की आग में धकेल चुकी है । सबसे पहले इसका प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने की उम्मीद है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने से तेल की सप्लाई बेहतर हो सकती है, जिससे भारत और चीन और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों को बड़ी राहत मिलेगी, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं।
इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात सामान्य होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी आसान हो सकता है। अमेरिका अगर ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देता है, तो इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
भारत पर क्या पड़ेगा इस समझौते का असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है। भारत के तेल आयात का भी बड़ा हिस्सा इस मार्ग पर निर्भर करता है। ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस जलमार्ग के खुलने से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार में बड़ी राहत मिल सकती है।