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प्रयागराज में माघ मेला 2026: संगम तट पर तैयारियां तेज, नाविकों को फिर अच्छे रोजगार की उम्मीद

प्रयागराज में माघ मेला 2026: संगम तट पर तैयारियां तेज, नाविकों को फिर अच्छे रोजगार की उम्मीद

संगम नगरी प्रयागराज एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजन के लिए तैयार हो रही है। करीब एक हफ्ते बाद यहां माघ मेला लगने जा रहा है। मेला शुरू होने से पहले ही प्रशासन और स्थानीय लोग पूरी तैयारी में जुट गए हैं। संगम तट पर इन दिनों जबरदस्त चहल-पहल देखने को मिल रही है। खासकर नाविकों में काफी उत्साह है, क्योंकि माघ मेला उनके लिए रोजगार का बड़ा साधन होता है।

 

महाकुंभ के बाद फिर बड़ी भीड़ की उम्मीद

साल की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ ने रिकॉर्ड बनाया था। देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। अब महाकुंभ 2025 के बाद 3 जनवरी से माघ मेले की शुरुआत होने जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार माघ मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से स्थानीय कारोबारियों, दुकानदारों और नाविकों को अच्छी कमाई होने की उम्मीद है।

 

इस बार माघ मेले की थीम होगी भगवा

प्रशासन इस बार माघ मेले को खास बनाने में जुटा है। मेले की थीम भगवा रखी गई है। संगम क्षेत्र में सजावट, लाइटिंग और व्यवस्थाओं को उसी रंग में तैयार किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति और आस्था की भव्य झलक मिले। पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ ही कल्पवास की शुरुआत हो जाएगी।

नावों की सजावट और संख्या में इजाफा

संगम तट पर इन दिनों नावों की जगमगाहट देखने लायक है। नाविक अपनी नावों को रंग-रोगन कर रहे हैं और लाइटिंग से सजा रहे हैं। फिलहाल संगम क्षेत्र में करीब 3000 से ज्यादा नावें मौजूद हैं। वहीं आसपास के जिलों और शहरों से भी नावें प्रयागराज पहुंच रही हैं। अनुमान है कि माघ मेले के दौरान कुल 6000 से ज्यादा नावों का संचालन किया जाएगा।

नाविकों का कहना है कि सरकार की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि नावों पर भगवा या ऑरेंज रंग के पर्दे लगाए जाएं। इससे पूरा संगम क्षेत्र एक जैसी थीम में नजर आएगा। हालांकि समय कम होने की वजह से सभी नावों को पूरी तरह सजाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन फिर भी नाविक पूरी कोशिश कर रहे हैं।

 

तय किया गया है नाव का किराया

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नावों का किराया पहले से तय कर दिया है।

  • बोट क्लब से संगम तक जाने का किराया ₹150
  • किला घाट से ₹90
  • अरैल घाट से ₹75
  • यमुना पट्टी से ₹60

 

 

नाविकों का कहना है कि यह किराया पुराना है और मौजूदा हालात के हिसाब से कम है। इसलिए वे किराया दोगुना करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें सही कमाई हो सके और श्रद्धालुओं से ज्यादा किराया लेने की शिकायत भी खत्म हो।

 

नाविकों की प्रमुख मांगें

माघ मेले को लेकर नाविक संघ ने प्रशासन के सामने कुछ मांगें रखी हैं।

  • नावों के किराए को दोगुना किया जाए
  • मोटर बोट का संचालन बंद किया जाए
  • सभी नाविकों को मुफ्त लाइफ जैकेट दी जाए
  • नाविकों के लिए 50 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा किया जाए

नाविकों का कहना है कि अगर ये मांगें मान ली जाती हैं तो उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और वे श्रद्धालुओं को बेहतर सेवा दे पाएंगे।

 

सुरक्षा और व्यवस्थाएं युद्ध स्तर पर

सरकार माघ मेले को लेकर सुरक्षा और सुविधाओं पर खास ध्यान दे रही है। करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टरों में मेला बसाया जा रहा है। साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं के लिए रहने, खाने, स्नान और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि इस बार माघ मेला पहले से ज्यादा व्यवस्थित और भव्य होगा।

 

श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार प्रयागराज

माघ मेला शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। संगम तट पर बढ़ती रौनक साफ बता रही है कि प्रयागराज एक बार फिर करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है। नाविकों से लेकर प्रशासन तक, सभी की नजरें इस मेले पर टिकी हैं। उम्मीद है कि माघ मेला 2026 न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से खास होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कमाई का बड़ा जरिया भी बनेगा।

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