हौसले की उड़ान – गांव, सीमा और मैदान से निकलकर बच्चों ने देश को किया गर्व महसूस
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित इन होनहार बच्चों ने विज्ञान, साहस और खेल के मैदान में साबित किया कि उम्र नहीं, हौसला और मेहनत इतिहास रचते हैं।

बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिभाशाली बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। भारत के अलग-अलग कोनों से निकली इन तीन कहानियों ने अपने हौसले और काम के चलते पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि उन बच्चों की पहचान है जो मुश्किल हालात में भी देश के लिए मिसाल बने। श्रवण सिंह, वैभव सूर्यवंशी और पूजा पाल की सभी जगह चर्चा हो रही है ।
सरहद पर इंसानियत की मिसाल बना श्रवण सिंह
पंजाब के फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव चक तरां वाली का रहने वाला श्रवण सिंह आज पूरे देश के लिए गर्व का नाम बन चुका है। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर चल रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जब हालात बेहद तनावपूर्ण थे, ड्रोन घुसपैठ और हमले का खतरा हर पल बना हुआ था, तब श्रवण ने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े लोग भी करने से हिचक जाते हैं। देशभक्ति से भरे इस बच्चे ने बिना किसी डर के रोज़ अग्रिम चौकियों तक जाना शुरू किया। सैनिकों के लिए पानी, दूध, लस्सी, चाय और बर्फ जैसी जरूरी चीजें पहुंचाईं। गर्मी, खतरा और डर कुछ भी उसे रोक नहीं सका। उसके लिए ये सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि देश के प्रति फर्ज़ था।
इसी असाधारण साहस के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में श्रवण सिंह को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इसे पूरे राज्य के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि श्रवण ने गुरुओं की शिक्षाओं को अपने कर्मों में उतारा है। सेना पहले ही श्रवण को सम्मानित कर चुकी है और उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी भी संभाल रही है। एक सीमावर्ती गांव का बच्चा, जो सरहद पर सैनिकों के लिए ‘लाइफलाइन’ बना, आज लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा बन गया है।

क्रिकेट की दुनिया में तूफान बनकर उभरे वैभव सूर्यवंशी
अगर बात प्रतिभा और रिकॉर्ड की हो, तो बिहार के 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का नाम खुद-ब-खुद सामने आ जाता है। इतनी कम उम्र में जिस तरह उन्होंने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है, वह किसी बड़े अजूबे से कम नहीं। विजय हजारे ट्रॉफी में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 84 गेंदों पर 190 रन की विस्फोटक पारी 15 छक्के, 36 गेंदों में शतक और लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का रिकॉर्ड। यह पारी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं थी, बल्कि उनके आत्मविश्वास और दबाव में खेलने की क्षमता का सबूत थी।
पूर्व भारतीय कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत तक वैभव की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने चयनकर्ताओं से अपील की कि उम्र नहीं, प्रतिभा देखी जाए जैसे कभी सचिन तेंदुलकर के साथ किया गया था। यूथ क्रिकेट से लेकर घरेलू स्तर तक, वैभव हर जगह रन बना रहे हैं। 15 यूथ वनडे मैचों में 51 से ज्यादा का औसत और करीब 159 का स्ट्राइक रेट उनके आधुनिक क्रिकेट माइंडसेट को दिखाता है। 26 दिसंबर को वैभव के लिए दिन बेहद खास रहा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। इसी वजह से वह विजय हजारे ट्रॉफी का एक मुकाबला नहीं खेल पाए, लेकिन ऐसे सम्मान के सामने किसी मैच का छूटना छोटा पड़ जाता है।
अब माना जा रहा है कि उनका पूरा फोकस अंडर-19 क्रिकेट पर रहेगा और 15 जनवरी से शुरू होने वाले अंडर-19 वर्ल्ड कप में वह भारत की जर्सी में नजर आ सकते हैं। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा सफर वैभव भारतीय क्रिकेट का भविष्य कहे जा सकते हैं।

गांव की बेटी, विज्ञान की उड़ान और पूजा पाल की कहानी
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक छोटे से गांव से निकली पूजा पाल की सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि इन सबके बीच पूजा ने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। पूजा ने किसानों की एक बड़ी समस्या को बहुत करीब से देखा फसल की मड़ाई के दौरान उड़ने वाली धूल। यही धूल किसानों के लिए सांस की बीमारियों का कारण बनती है। इसी समस्या से प्रेरित होकर पूजा ने धूल रहित थ्रेसर का मॉडल तैयार किया, जो मड़ाई के समय धूल को नियंत्रित करता है और काम को सुरक्षित बनाता है।
कक्षा 7 में पढ़ते समय उन्होंने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में यह मॉडल प्रस्तुत किया। इसके बाद इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत उनका नवाचार जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर चुना गया। यहां तक कि उन्हें जापान जाकर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला। आज पूजा कक्षा 12 की छात्रा हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और मां सरकारी स्कूल में रसोईया हैं। पांच भाई-बहनों के साथ पली-बढ़ी पूजा ने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। शिक्षक राजीव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन ने उनकी सोच को सही दिशा दी।

एक पुरस्कार, अनगिनत प्रेरणाएं
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 5 से 18 साल के बच्चों को खेल, बहादुरी, नवाचार, विज्ञान, समाज सेवा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। इस साल कुल 20 बच्चों को चुना गया, जिनमें श्रवण सिंह, वैभव सूर्यवंशी और पूजा पाल जैसे नाम शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में कहा कि “इन बच्चों की उपलब्धियां पूरे देश को प्रेरित करती हैं और भारत को दुनिया में चमकाने का काम करती हैं। हर बच्चा अपने-अपने क्षेत्र में खास है और यही भारत की असली ताकत है।”