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क्या सच में ज्योति याराजी की रेस के वक्त स्टेडियम खाली था? सोशल मीडिया पर वायरल ज्योति याराजी कौन है !

ज्योति याराजी

पोडियम पर खड़ी आख़िर क्यों रो पड़ी ज्योति ! जिनके जज्बे को दुनिया आज कर रही है सलाम

कुछ सेकंड के इस वीडियो ने लोगों को भावुक कर दिया, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई जा रही है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है इस वीडियो में आपने देखा होगा एक भारतीय एथलीट है जिनकी आंखों में आंसू नजर आ रहे है और इसे इस भावना के साथ शेयर किया गया कि जब ज्योति दौड़ रही थीं, तब स्टेडियम खाली था, कोई वहाँ उत्साहवर्धन के लिए नहीं था, कोई उन्हें चीयर नहीं कर रहा था। कुछ लोगों ने क्रिकेट के साथ कुछ स्टार को भी घसीट लिया गया कि भारत सिर्फ क्रिकेटरों को सिर आंखों पर बैठाता है, एथलीट्स को नहीं। लेकिन जैसे अक्सर सोशल मीडिया पर होता है, कहानी का एक हिस्सा दिखाया गया, पूरी तस्वीर नहीं।

क्या हैं वॉयरल वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर तमाम तरह के दावे किये जा रहे है । कहीं इसे 2025 की एथलेटिक्स चैंपियनशिप बताकर शेयर किया जा रहा है, वह दरअसल 2023 की एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप का है। कई मीडिया रिपोर्ट में यह प्रतियोगिता कोरिया के गुमी में आयोजित बताई जा रही है। हालांकि ये थाईलैंड के बैंकॉक में हुई थी। ज्योति ने उस टूर्नामेंट में महिलाओं की 100 मीटर हर्डल्स में गोल्ड मेडल जीता था।

रेस के वक्त स्टेडियम में दर्शक मौजूद थे। लेकिन मेडल सेरेमनी से ठीक पहले अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश की वजह से स्टेडियम में बैठे ज्यादातर दर्शक बाहर चले गए या कवर वाले स्टैंड में शिफ्ट हो गए। इसी कारण वीडियो में पोडियम के पीछे के स्टैंड खाली नजर आते हैं। और सबसे अहम बात यह ज्योति का पहला इंटरनेशनल गोल्ड मेडल था। आंखों में आंसू अकेलेपन के नहीं, उस पल तक पहुंचे लंबे संघर्ष के थे।

कौन हैं ज्योति याराजी

ज्योति याराजी सिर्फ एक वायरल वीडियो का चेहरा नहीं हैं। वह भारत की नंबर 1 महिला 100 मीटर हर्डलर हैं और इस इवेंट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक भी। 2023 में चीन में हुए FISU वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में उन्होंने 12.78 सेकेंड का समय निकालकर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया। ट्रैक एंड फील्ड में उनका नाम आज एशिया की टॉप हर्डलर्स में गिना जाता है।

कई मुश्किलों का किया सामना

28 अगस्त 1999 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में जन्मीं ज्योति का बचपन आसान नहीं था। पिता एक प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड थे और मां अस्पताल में पार्ट-टाइम सफाई कर्मचारी। घर में पैसों की हमेशा तंगी रही, लेकिन यही तंगी उनके हौसले की सबसे बड़ी वजह भी बनी। स्कूल के दिनों में उनके फिजिकल एजुकेशन टीचर ने उनकी फुर्ती और लंबाई को पहचाना और हर्डल्स के लिए प्रेरित किया। यही वह मोड़ था, जहां से ज्योति की जिंदगी की दिशा बदलने लगी।

2015 के बाद बदली रफ्तार

2015 में आंध्र प्रदेश इंटर-डिस्ट्रिक्ट मीट में गोल्ड जीतने के बाद ज्योति ने हैदराबाद के SAI सेंटर में ट्रेनिंग शुरू की। यहां उनकी मुलाकात ओलंपियन और द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच एन. रमेश से हुई। शुरुआती सालों में सफलता धीरे-धीरे मिली, लेकिन ज्योति की सबसे बड़ी ताकत रही कंसिस्टेंसी। वह हारकर भी रुकने वाली एथलीट नहीं थीं।

रिलायंस फाउंडेशन और करियर का टर्निंग पॉइंट

2019 में ज्योति ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित रिलायंस एथलेटिक्स हाई परफॉर्मेंस सेंटर पहुंचीं। यहीं उनकी मुलाकात ब्रिटिश कोच जेम्स हिलियर से हुई। उनके मार्गदर्शन में ज्योति की तकनीक, स्टार्ट और मेंटल स्ट्रेंथ में बड़ा बदलाव आया। कई बार उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ने वाले समय निकाले, लेकिन तेज हवा या तकनीकी कारणों से वे आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं बन पाए। इसके बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा। मई 2022 में साइप्रस के लिमासोल इंटरनेशनल मीट में आखिरकार उन्होंने 13.23 सेकेंड में रेस पूरी कर दो दशक पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया।

मेडलों की लगाई झड़ी

2023 ज्योति के करियर का सबसे अहम साल रहा।

  •  एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप – गोल्ड
  •  FISU वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स – ब्रॉन्ज
  • एशियन गेम्स (हांगझू) – सिल्वर

इसके बाद 2025 में उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना गोल्ड मेडल डिफेंड किया और नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड भी बनाया। ज्योति आज उस एथलीट्स की कतार में हैं, जिन्हें पूरा प्रोफेशनल सपोर्ट मिलता है। रिलायंस फाउंडेशन उनके ट्रेनिंग, डाइट, ट्रैवल और किट का खर्च उठाता है। एडिडास उन्हें स्पॉन्सर करता है और वह भारत सरकार की TOPS स्कीम का भी हिस्सा रही हैं। पेरिस ओलंपिक 2024 में ज्योति का सफर रेपचेज राउंड में खत्म हो गया। वह पदक नहीं जीत पाईं, लेकिन इसके बावजूद उनके जज्बे और निरंतर प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 2024 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सिर्फ मेडल्स का नहीं, बल्कि उस सफर का था जिसमें उन्होंने हर बार गिरकर खुद को उठाया।

 

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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