बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या, भारत में सड़कों पर आक्रोश
दिल्ली समेत कई शहरों में VHP का प्रदर्शन, सुरक्षा चिंताओं के बीच बांग्लादेश ने वीजा सेवाएं रोकीं

बांग्लादेश में लगातार हो रहीं घटनाओं का असर अब भारत तक आ पहुंचा हैं। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। हत्या के बाद उसके शव को आग लगा दी गई, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया। शुरुआत में दावा किया गया कि दीपू ने फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली कोई टिप्पणी की थी, जिसके चलते यह घटना हुई। लेकिन शुरुआती जांच में इस दावे के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। जैसे-जैसे सच सामने आया, यह मामला मॉब लिंचिंग और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया।
भारत में सड़कों पर उतरी विश्व हिंदू परिषद
दीपू चंद्र की हत्या के खिलाफ भारत में विश्व हिंदू परिषद ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। संगठन का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं और दीपू की हत्या उसी का उदाहरण है। आज सुबह दिल्ली में VHP के कार्यकर्ता बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन करते नजर आए। हाथों में तख्तियां और नारे लगाते हुए उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और बांग्लादेश सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की। दिल्ली के अलावा मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, भोपाल और जम्मू में भी रैलियां निकाली गईं। हर जगह एक ही मांग सुनाई दी। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों को सजा मिले।
बांग्लादेश का कड़ा रुख
भारत में हो रहे इन प्रदर्शनों पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया है। यह पिछले 10 दिनों में दूसरी बार है जब उन्हें बुलाया गया। बांग्लादेश का कहना है कि भारत में उसके राजनयिक मिशनों और कार्यालयों के बाहर हो रहे प्रदर्शन चिंता का विषय हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में हुई घटनाएं अस्वीकार्य हैं और इससे राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ है।

वीजा सेवाओं पर भी पड़ा असर
सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच बांग्लादेश ने बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में बांग्लादेशी वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं। 22 दिसंबर को सिलीगुड़ी स्थित बांग्लादेश वीजा सेंटर में तोड़फोड़ की गई थी। इससे पहले 20 दिसंबर को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुआ था। इन्हीं घटनाओं को आधार बनाकर बांग्लादेश ने वीजा सेवाएं रोकने का फैसला किया। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि जब तक सुरक्षा हालात सामान्य नहीं होते, तब तक यह फैसला जारी रहेगा।
10 दिनों में कैसे बढ़ा तनाव
- 14 दिसंबर को बांग्लादेश ने पहली बार भारतीय उच्चायुक्त को तलब कर शेख हसीना के बयानों पर नाराजगी जताई।
- 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की हत्या हुई, जिसने हालात को विस्फोटक बना दिया।
- 19 दिसंबर को इस हत्या के खिलाफ बांग्लादेश और दूसरे देशों में आक्रोश देखने को मिला।
- 20 दिसंबर को भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई।
- 22 दिसंबर को सिलीगुड़ी में वीजा सेंटर में तोड़फोड़ हुई और इसके जवाब में वीजा सेवाएं रोकी गईं।
- 23 दिसंबर को एक बार फिर दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुआ और बांग्लादेश ने भारतीय उच्चायुक्त को दोबारा तलब किया।
दूतावासों की सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि हिंसा, तोड़फोड़ और डराने-धमकाने जैसी घटनाएं न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि आपसी सम्मान और शांति जैसे मूल्यों को भी कमजोर करती हैं। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय उच्चायुक्त से कहा गया है कि भारत सरकार बांग्लादेशी दूतावासों और उनसे जुड़े ठिकानों की सुरक्षा तुरंत कड़ी करे। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
दरअसल, दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। बांग्लादेशी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद वहां भारत विरोधी प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद मैमनसिंह जिले में दीपू चंद्र की मॉब लिंचिंग ने हालात और बिगाड़ दिए। बांग्लादेश ने यह भी आरोप लगाया है कि भारत में रहकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना लगातार ऐसे बयान दे रही हैं, जिन्हें ढाका सरकार भड़काऊ मानती है। इसी वजह से बांग्लादेश सरकार ने भारत से नाराजगी जताई है।