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आख़िर क्रिसमस के दिन चिमनी के पास मोजे क्यों लटकाए जाते हैं? सेंट निकोलस से इसका क्या संबंध है !

क्रिसमस

मोज़े में गिफ्ट देने की परंपरा सिर्फ रस्म नहीं, बल्कि इंसानियत और मदद की याद है

क्रिसमस की इस प्यारी परंपरा के पीछे एक दयालु संत और तीन गरीब बहनों की कहानी जुड़ी है

क्या आपको पता हैं कि आख़िर क्रिसमस के दिन चिमनी के पास मोजे क्यों लटकाए जाते हैं? अगर नहीं, तो आज हम इस सवाल का जवाब देने वाले हैं।

25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस पूरी दुनिया में खुशी, प्यार और अपनों को गिफ्ट देने का त्योहार माना जाता है। जैसे ही क्रिसमस का नाम आता है, दिमाग में सांता क्लॉज, क्रिसमस ट्री, केक, घंटियां और रंग-बिरंगे गिफ्ट्स की तस्वीर उभर आती है। खासतौर पर बच्चों के लिए यह दिन किसी जादू से कम नहीं होता। क्रिसमस आने में बस दो दिन बाकी हैं और क्रिसमस डे हमेशा की तरह 25 दिसंबर को मनाया जाता हैं। क्रिसमस की सुबह बच्चे सबसे पहले अपने बिस्तर के पास या क्रिसमस ट्री पर टंगे मोज़ों की ओर देखते हैं, क्योंकि उन्हें यकीन होता है कि सांता क्लॉज उनके लिए वहां कुछ खास छोड़कर गए होंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गिफ्ट मोज़ों में ही क्यों दिए जाते हैं?

 

मोज़ों में गिफ्ट देने की परंपरा कहां से आई?

क्रिसमस पर मोज़ों में गिफ्ट मिलने की यह परंपरा यूं ही नहीं बनी। इसके पीछे एक पुरानी और बेहद भावुक कहानी जुड़ी हुई है, जो सेंट निकोलस से संबंधित मानी जाती है। सेंट निकोलस चौथी शताब्दी में तुर्की के रहने वाले एक दयालु और नेक इंसान थे। वे गरीबों और जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए जाने जाते थे। अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा वे चुपचाप दूसरों की भलाई में लगा देते थे। बाद में यही सेंट निकोलस दुनिया भर में सांता क्लॉज के नाम से मशहूर हुए।

पौराणिक कथा के पीछे क्या हैं कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक बहुत ही गरीब व्यक्ति रहता था, जिसकी तीन बेटियां थीं। उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह बेटियों की शादी के लिए दहेज का इंतजाम नहीं कर पा रहा था। इस बात की चिंता उसे दिन-रात सताती रहती थी कि उसकी बेटियों का भविष्य क्या होगा। जब सेंट निकोलस को इस परिवार की परेशानी के बारे में पता चला, तो उन्होंने उनकी मदद करने का मन बनाया। लेकिन वे नहीं चाहते थे कि किसी को पता चले कि मदद किसने की है। एक रात सेंट निकोलस चुपके से उस व्यक्ति के घर पहुंचे। उन्होंने चिमनी के रास्ते घर के अंदर सोने के सिक्कों से भरी तीन थैलियां नीचे फेंक दीं। उस रात परिवार के लोग अपने मोज़े धोकर सूखने के लिए चिमनी के पास टांगकर सो गए थे। ऊपर से गिराई गई सोने की थैलियां सीधे उन्हीं मोज़ों में जा गिरीं। अगली सुबह जब बेटियों ने अपने मोज़े देखे, तो वे सोने के सिक्कों से भरे हुए थे। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन पैसों से तीनों बेटियों की शादी हो गई और परिवार की जिंदगी बदल गई।

कैसे बनी यह क्रिसमस की परंपरा?

इस घटना के बाद लोगों में यह विश्वास बनने लगा कि सेंट निकोलस रात के अंधेरे में आकर गुपचुप तरीके से आते हैं और लोगों की मदद करते हैं। धीरे-धीरे यह मान्यता फैल गई कि सांता क्लॉज क्रिसमस की रात चिमनी के रास्ते आते हैं और बच्चों के मोज़ों में गिफ्ट छोड़ जाते हैं। यहीं से मोज़ों में गिफ्ट देने की परंपरा शुरू हुई, जो आज पूरी दुनिया में बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।

आज भी क्रिसमस के एक दिन पहले बच्चे बड़े प्यार से अपने मोज़े टांगते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि सुबह उठते ही उनमें चॉकलेट, कैंडी, खिलौने या उनकी पसंद की कोई चीज मिलेगी। यह परंपरा बच्चों के लिए सिर्फ गिफ्ट पाने का जरिया नहीं, बल्कि उम्मीद और खुशी का प्रतीक बन चुकी है।

आज के दौर में क्रिसमस स्टॉकिंग्स

समय के साथ यह परंपरा और मजबूत हो गई है। अब बाजारों में खास तरह के क्रिसमस स्टॉकिंग्स मिलते हैं, जिन पर सांता क्लॉज, स्नोमैन और क्रिसमस से जुड़े डिजाइन बने होते हैं। लोग इन्हें घर की सजावट का हिस्सा बना चुके हैं। भले ही आज के समय में ज्यादातर घरों में चिमनी न हो, लेकिन फिर भी लोग क्रिसमस ट्री, दीवार या बिस्तर के पास मोज़े टांगते हैं। परंपरा बदली नहीं, बस उसका तरीका थोड़ा बदल गया है।

 

 

 

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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