लोकसभा में चुनाव सुधार बहस के दौरान अमित शाह का बड़ा हमला

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को चुनाव सुधार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखे हमले किए। तकनीकी मुद्दों पर शुरू हुई बहस जल्द ही राजनीतिक इतिहास और कांग्रेस के 70 साल पुराने निर्णयों तक पहुंच गई। शाह ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
नेहरू को PM बनाए जाने पर सवाल
शाह ने अपने भाषण की शुरुआत आज़ादी के बाद पहले प्रधानमंत्री के चयन के मुद्दे से की। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस के भीतर बहुमत सरदार पटेल के साथ बताया जाता है, लेकिन प्रधानमंत्री नेहरू को बना दिया गया। शाह ने इसे “लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी” और “पहला बड़ा गलत फैसला” बताया। इस टिप्पणी पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, लेकिन शाह ने अपनी बात जारी रखी। शाह का आरोप – इंदिरा गांधी की सरकर ने नियमों का उल्लंघन किया गृहमंत्री ने 1970 के दशक की उस घटना का जिक्र किया जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी की रायबरेली से जीत को नियमों के उल्लंघन के कारण अमान्य कर दिया था। शाह ने आरोप लगाया कि इसके बाद संसद में ऐसा कानून लाया गया, जिससे प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ मामलों में कार्रवाई संभव न रहे। उन्होंने इसे “वोट की सच्चाई पर पर्दा डालने” जैसा बताया।
चुनाव आयोग की नियुक्ति पर शाह का जवाब
चुनाव आयोग की नियुक्ति पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि यह वही लोग हैं जो उस दौर को भूल जाते हैं जब वरिष्ठता को नज़रअंदाज़ कर एक जूनियर जज को सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। बाद में वही बेंच इंदिरा गांधी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। शाह ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता से खिलवाड़ बताया।
सोनिया गांधी की नागरिकता पर सवाल
शाह ने एक हालिया याचिका का जिक्र किया, जिसमें दावा है कि सोनिया गांधी भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता बन गई थीं। जैसे ही उन्होंने यह बात कही, विपक्षी सांसद विरोध में शोर मचाने लगे। शाह ने कहा कि मामला अदालत में है और जवाब भी वहीं देना होगा।
SIR विवाद: शाह ने विपक्ष के आरोप खारिज किए
विपक्ष ने SIR को “वोटर हटाने की साजिश” बताया था। शाह ने इसे गलत बताते हुए कहा कि सरकार केवल उन नामों को हटाती है जो विदेशी नागरिक हैं और गलत तरीके से सूची में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि “हर विदेशी की पहचान करना और उसे सूची से हटाना” सरकार की नीति है। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष इसलिए परेशान है क्योंकि वह “गलत तरीकों से चुनाव जीतने की उम्मीद” नहीं लगा पा रहा।
राहुल गांधी से नोकझोंक, विपक्ष का वॉकआउट
बहस के दौरान राहुल गांधी ने शाह को चुनौती दी कि वे ‘वोट चोरी’ पर उनकी तीन प्रेस कॉन्फ़्रेंस पर बहस करें। इस पर सदन में तीखी नोकझोंक हुई और कुछ देर बाद विपक्षी दल वॉकआउट कर गए, हालांकि शाह ने अपना भाषण जारी रखा।
EVM और चुनाव आयोग पर सवालों पर पलटवार
शाह ने कहा कि विपक्ष हार का दोष कभी EVM पर, कभी चुनाव आयोग पर और अब ‘वोट चोरी’ पर डालता है। उन्होंने कहा कि 2014 से 2025 के बीच बीजेपी ने 44 चुनाव जीते और विपक्ष ने भी 30 चुनाव जीते। “अगर मतदाता सूची गलत होती तो विपक्ष जीत ही कैसे पाता?” शाह का तर्क था। आगे अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार के लिए जिम्मेदारी दूसरों पर डाल देती है”पत्रकार सवाल पूछे तो BJP समर्थक बता देती है। चुनाव हारे तो EVM को दोष। केस हारे तो न्यायपालिका पर आरोप।“ उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस के कार्यकर्ता एक दिन अपने नेतृत्व से असली गलती पूछेंगे।
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