
आरबीआई ने रेपो रेट 0.25% घटाकर 5.25% किया, EMI में मिलेगी राहत
खुदरा महंगाई अक्टूबर 2025 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर, कोर इंफ्लेशन भी घटकर 2.6%
GDP ग्रोथ Q2 (2025-26) में 8.1%, मजबूत अर्थव्यवस्था के चलते दरों में कटौती का मिला आधार
आरबीआई की मॉनीटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। जैसे अनुमान जताया जा रहा था आरबीआई ने रेपो रेट की दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर दी है। अब रेपो रेट की दर 5.25% हो गई है । 3 से 5 दिसंबर तक चली आरबीआई की मौद्रिक नीति की बैठक में ये फैसला लिया गया । आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी जानकारी दी। रेपो रेट में कटौती से आम जनता को ईएमआई में राहत मिलेगी।
कोविड के बाद से ही आरबीआई ने लंबे समय तक रेपो रेट की दर स्थिर रखी थी। लेकिन फरवरी से लेकर अब तक आरबीआई रेपो रेट में 1% कम कर चुका था । हालांकि आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा की पिछली दो बैठकों में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था और यह 5.5 % पर स्थिर रखी हुई थी । अब ये दर घटकर 5.25% हो गई है ।
आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा
इसके अलावा आरबीआई ने मार्केट में लिक्विडिटी लाने के लिए भी कुछ घोषणाएं की है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अक्टूबर 2025 में खुदरा महंगाई दर ऐतिहासिक रूप से गिरी है और सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है । इसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों में कमी रही है। इसके अलावा कोर महंगाई भी 2.6% पर आ गई है । भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट इस साल की दूसरी तिमाही में 1.3% पर आ गया है।
आरबीआई का खुदरा महंगाई को लेकर जो लक्ष्य है उसके आसपास ही महंगाई दर चल रही है। साथ ही 2025- 26 के दूसरे क्वार्टर में जीडीपी की ग्रोथ रेट 8.1 प्रतिशत रही। इसके पहले क्वार्टर में यही वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही जो सरकार के लिए उत्साह जनक आंकड़े हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है जिसकी वजह से आरबीआई के पास इसमें कमी करने का पूरा स्कोप है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को और रफ्तार दिया जा सके । अभी वित्तीय वर्ष 26 में जीडीपी की ग्रोथ का अनुमान 6.8 है जिसे आरबीआई ऊपर ले जाना चाहेगा।

क्या होता है रेपो रेट
देश की राजकोषीय नीति निर्माण के लिए सरकार राजकोषीय पॉलिसी बनती है वैसे ही आरबीआई के पास मॉनिटरी पॉलिसी बनाने के लिए अलग-अलग टूल होते हैं। जिनमें से एक रेपो रेट है । ये वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक व्यापारिक और अन्य बैंकों को ऋण प्रदान करती है। अगर आरबीआई रेपो रेट में वृद्धि करती है तो व्यापारिक और तमाम बैंकों को ऋण महंगा मिलता है। इसी प्रकार अपना मार्जिन रख ग्राहकों को बैंक भी ऊंची दरों पर ऋण प्रदान करते हैं ।
जब आरबीआई को महंगाई को नियंत्रित करना हो उसे समय आरबीआई रेपो रेट में वृद्धि करती है ऊंची दरों की वजह से आम जनता अपेक्षाकृत कम ब्याज लेती है। बाजार में मुद्रा की सप्लाई कम होने से महंगाई नियंत्रित होती है। जब आरबीआई को बाजार को अतिरिक्त पैसा देना होता है जिससे कि व्यापार बढ़े और आम जनता अधिक खरीदी करें उसे समय आरबीआई रेपो रेट की दरों को कम करती है। जिससे तमाम कमर्शियल बैंक्स कम दरों पर ऋण हासिल करें और यही फायदा जनता तक भी पहुंचे।
आम जनता के लिए क्यों है अहम
आम जनता के लिए रेपो रेट काफी अहम इसीलिए भी है क्योंकि इसका असर होम लोन की ब्याज दरों से लेकर पर्सनल लोन और ईएमआई तक पर भी पड़ता है । अगर आरबीआई दरों में कटौती करता है तो लाखों करोड़ों परिवारों को इनमें राहत मिलती है। इनमें वृद्धि करने पर ईएमआई से लेकर कार लोन तक में बढ़ोतरी हो सकती है। आरबीआई के इस कदम से देश में हाउसिंग डिमांड बढ़ने की संभावना है ।
आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं प्रत्येक 2 महीने में एमपीसी की बैठक होती है। इन सदस्यों में तीन सदस्य आरबीआई के होते हैं और तीन केंद्र सरकार नियुक्त करती है वीटो की पावर आरबीआई गवर्नर के पास होती है।