अक्टूबर 2024 में 1.25 लाख इंटर्नशिप अवसर प्रदान करने के लिए पायलट परियोजना शुरू की गई थी, लेकिन साल खत्म होने तक केवल 2,000 इंटर्नशिप ही पूरी हो पाईं।

कोविड के समय देश में कौशल विकास और रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना शुरू की गई थी। सरकार अक्सर बड़े दावों के साथ योजनाएं लॉन्च करती है, लेकिन उनकी असली तस्वीर तब सामने आती है जब वास्तविक डेटा उपलब्ध होता है। संसद में दिए गए सरकारी जवाब से योजना की हकीकत स्पष्ट हो रही है।
सिर्फ 2,000 उम्मीदवारों ने इंटर्नशिप पूरी की
अब तक मिले आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों ने 1,65,000 इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराए, जिनमें से उम्मीदवारों ने 33,300 प्रस्ताव स्वीकार किए। लेकिन इंटर्नशिप पूरी करने वालों की संख्या सिर्फ 2,000 रही। वहीं 6,618 उम्मीदवारों ने बीच में ही इंटर्नशिप छोड़ दी। पहले साल के लिए सरकार ने 1,25,000 इंटर्नशिप का लक्ष्य रखा था।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसकी घोषणा पिछले वर्ष के केंद्रीय बजट में की गई थी। इसका लक्ष्य पाँच वर्षों में देश की शीर्ष 500 कंपनियों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराना है।
पायलट प्रोजेक्ट ने लक्ष्य पार किया
योजना के तहत पहले वर्ष में 1,25,000 अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य था, जिसे पायलट चरण में पार भी कर लिया गया। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार कंपनियों ने लगभग 1,65,000 इंटर्नशिप प्रस्ताव दिए, जो तय लक्ष्य से अधिक था। कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि कंपनियों ने दो चरणों में इंटर्नशिप प्रस्ताव दिए।
पहला और दूसरा चरण
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में कंपनियों ने पोर्टल पर 1.27 लाख अवसर पोस्ट किए, जिनके लिए 6.21 लाख आवेदन मिले। इसके आधार पर 82,000 ऑफर जारी किए गए, जिनमें से 8,700 ऑफर उम्मीदवारों ने स्वीकार किए।
जनवरी 2025 से पायलट योजना का दूसरा चरण शुरू हुआ। इस चरण में कंपनियों ने 1.18 लाख अवसर पोस्ट किए, जिन पर 4.55 लाख से अधिक आवेदन आए। 26 नवंबर 2025 तक कंपनियों ने 83,000 से अधिक प्रस्ताव जारी किए, जिनमें से लगभग 30% स्वीकार किए गए।
क्यों सिर्फ 20% युवाओं ने प्रस्ताव स्वीकार किए?
कंपनियों द्वारा दिए गए प्रस्तावों में से केवल 20% उम्मीदवारों ने ऑफर स्वीकार किए। सबसे बड़ी वजह कार्यस्थल का दूसरे शहर में होना और इंटर्नशिप की लंबी अवधि रही। जो उम्मीदवार इंटर्नशिप पर शामिल हुए, उनमें से भी 20% ने इसे पूरा नहीं किया।
निराशाजनक प्रदर्शन की मुख्य वजहें
सरकार के अनुसार इंटर्नशिप की लगभग 12 महीने की अवधि बहुत लंबी है। सामान्य कॉर्पोरेट सेक्टर में इंटर्नशिप 3 से 6 महीने तक होती है, इसलिए छात्र लंबी इंटर्नशिप में रुचि नहीं दिखा रहे थे। इसके अलावा कई उम्मीदवार कंपनियों के स्थान तक पहुँचने में सक्षम नहीं थे। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए शुरुआती बजट 840 करोड़ रुपये रखा था।
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