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8th Pay Commission: वित्त मंत्रालय ने DA मर्जर पर तोड़ी चुप्पी! अटकलों पर विराम लगाते हुए यह बताया

8th Pay Commission: वित्त मंत्रालय ने DA मर्जर पर तोड़ी चुप्पी! अटकलों पर विराम लगाते हुए यह बताया

 

8वें वेतन आयोग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में मर्ज करने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि आयोग का गठन तो हो चुका है, लेकिन DA को मूल वेतन में शामिल करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। सरकार ने कहा कि अभी DA/DR का संशोधन पुराने तरीके से, यानी AICPI-IW इंडेक्स के आधार पर हर छह महीने में ही जारी रहेगा।

 

DA मर्जर पर वित्त राज्य मंत्री का बयान

लोकसभा में यह मुद्दा शीतकालीन सत्र के पहले दिन उठा, जब समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने सरकार से 8वें वेतन आयोग की स्थिति और DA मर्जर पर सवाल पूछा। इस पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 3 नवंबर 2025 को आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है और गजट की प्रति सदन में रखी गई। लेकिन DA मर्जर पर उन्होंने साफ कहा कि ऐसी किसी योजना पर सरकार विचार नहीं कर रही है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदों को झटका लगा है।

 

पेंशनरों की Terms of Reference को लेकर चिंता

वहीं, 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference (ToR) को लेकर कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि ToR में कई अहम बातें स्पष्ट नहीं हैं, जबकि 7वें वेतन आयोग में पेंशनरों के हितों का स्पष्ट उल्लेख था। इस बार ToR में पेंशन संशोधन को लेकर अस्पष्टता है, जिससे यह चिंता बढ़ी है कि पेंशनरों की मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलेगा। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से लागू होगा या किसी अन्य तारीख से।

DA मर्जर की मांग इसलिए तेज हुई थी क्योंकि बढ़ती महंगाई ने कर्मचारियों की वास्तविक आय पर असर डाला है। संगठनों का कहना है कि छमाही DA संशोधन से महंगाई का पूरा बोझ कम नहीं होता, जिससे उनकी क्रय क्षमता लगातार घट रही है। इसलिए DA को मूल वेतन में शामिल करने से वेतन में स्थायी बढ़ोतरी होती और भविष्य के भत्ते व पेंशन भी बढ़ते।

 

अब 8वां वेतन आयोग अपनी प्रक्रिया शुरू करेगा और विभिन्न मंत्रालयों, विभागों व कर्मचारी संगठनों से आंकड़े और सुझाव जुटाएगा। हालांकि ToR को लेकर असंतोष जारी है, इसलिए आने वाले महीनों में कर्मचारी संगठन सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ा सकते हैं। सरकार और कर्मचारियों के बीच इस विषय पर आगे की बातचीत महत्वपूर्ण साबित होगी।

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Shashwat Srijan

Content Writer

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