BIS के नए Earthquake Zonation Map के मुताबिक पूरा हिमालय अब सबसे खतरनाक ज़ोन-6 में आता है और दिल्ली सहित कई इलाकों में भूकंप का जोखिम काफी बढ़ गया है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है? अगर हम प्राकृतिक आपदाओं पर नजर घुमाएँ तो शायद हमारे दिमाग में पहला ख्याल बाढ़, सूखा, जंगलों में लगने वाली भीषण आग सबसे पहले आएगी। थोड़ा आगे बढ़कर सोचेंगे तो जलवायु परिवर्तन हमारे दिमाग पर दस्तक दे जाएगी। लेकिन हम अक्सर भूकंप से होने वाले विनाशकारी प्रभावों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। हाल ही में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने एक ऐसा मैप जारी किया है जो शायद हमारे होश उड़ा दे। इस मैप का नाम है Earthquake Zonation Map
इसमें देश में भूकंप को लेकर बेहद चिंताजनक आशंकाएँ व्यक्त की गई हैं, जिसमें हिमालयी क्षेत्रों को सबसे खतरनाक ‘ज़ोन-6’ में रखा गया है। राजधानी दिल्ली तक का भूकंप जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इन क्षेत्रों में सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लगातार काम कर रही है। लगातार सड़क, नई रेलवे लाइन का निर्माण और ब्रिज बनाए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों पर पर्यटन का दबाव भी साल-दर-साल बढ़ता ही चला जा रहा है।
हिमालय पूरा ‘ज़ोन-6’: सबसे खतरनाक श्रेणी
नए मैप में भारत के सभी हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल को सबसे खतरनाक ज़ोन-6 में रखा गया है। ये क्षेत्र अब उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्र माने जाएंगे।
दक्षिण भारत अपेक्षाकृत सुरक्षित
दक्षिण भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया है क्योंकि यह पूरा क्षेत्र डेक्कन प्लेटो यानी स्थिर भूखंड पर स्थित है। मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई कम जोखिम वाले माने गए हैं। हालांकि, मुंबई और चेन्नई के कुछ हिस्सों में जोखिम काफी अधिक है। इसलिए इन जगहों को उच्च सतर्कता ज़ोन में रखा गया है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय में पिछले 200 सालों से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, लेकिन इस क्षेत्र में सड़क, सुरंग और भारी निर्माण परियोजनाओं ने जमीन को कमजोर किया है। कमजोर मिट्टी और वेटलैंड्स वाले इलाकों में भूकंप की तरंगें तेज़ी से फैलती हैं, जिससे नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। इसी वैज्ञानिक आधार पर पूरे मैप को अपडेट किया गया है।
नए मैप में क्या है अलग
पहले भारत 4 ज़ोन्स में बंटा था ज़ोन-2, 3, 4 और ज़ोन-5 (सबसे खतरनाक)। अब ज़ोन-5 को दो भागों में बाँटकर ज़ोन-5 और नया ज़ोन-6 बनाया गया है। भारत में ज़ोन-1 नहीं होता है।
ये नया अर्थक्वेक बिल्डिंग कोड और सीस्मिक ज़ोनेशन मैप जारी किया है। इसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने तैयार किया है, जो कि मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स के अंतर्गत आता है। यह मैप देश में भूकंप की तीव्रता, प्रभाव और जोखिम वाले इलाकों का नया वैज्ञानिक मूल्यांकन है। नया कोड 1 जनवरी 2026 से लागू होगा।
यह नया मैप सिर्फ किसी फाइल में दर्ज वैज्ञानिक डेटा भर नहीं है। विशेषज्ञ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की शहरी योजना का ब्लूप्रिंट मान रहे हैं। आने वाले दशकों में देश जिस तेज़ी से बदल रहा है, वह चुनौतियों को कई गुना बढ़ा सकता है। अगले 50 वर्षों में आबादी का दबाव, शहरों का लगातार फैलाव और पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक बढ़ती निर्माण गतिविधियाँ देश की सुरक्षा और विकास मॉडल की असली परीक्षा लेंगी।
इसीलिए अब ज़रूरत सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि साइंटिफिक प्लानिंग और जिम्मेदार डेवलपमेंट की है ऐसी प्लानिंग, जो आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा भी कर सके हमारे शहरों की मजबूती पर भी ध्यान दे और जिसमें प्रकृति के साथ कम से कम छेड़छाड़ के साथ हो।
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