वक्फ संपत्ति विवाद पर लगेगी लगाम? बंगाल में नई डिजिटल मुहिम शुरू!
वक्फ संशोधन कानून 2025: बंगाल सरकार ने महीनों की देरी के बाद माना, अब 82 हज़ार वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा।

देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस के बीच अब एक बड़ा बदलाव सामने आया है। नए वक्फ संशोधन कानून 2025 को लागू करने की दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार कदम बढ़ा दिया है। कई हफ्तों तक इस कानून का विरोध और इसे लागू करने में हिचकिचाने के बाद राज्य सरकार ने अब निर्देश जारी कर दिए हैं कि राज्य की करीब 82,000 वक्फ संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड 5 दिसंबर तक ऑनलाइन अपलोड किया जाए।
यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि तीन महीने पहले तक राज्य सरकार की स्थिति बिल्कुल अलग थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह केंद्र का यह कानून पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। उस समय इसे समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता और अधिकारों में दखल कहा गया था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं और सरकारी स्तर पर आदेश निकल चुका है।

नया कानून क्यों लाया गया?
वक्फ संपत्तियाँ मुख्य रूप से धार्मिक, सामाजिक और चैरिटी उद्देश्यों के लिए दान की गई जमीनें या इमारतें होती हैं। यह संपत्तियाँ न तो बेची जा सकती हैं, न किराए पर दी जा सकती हैं और न ही निजी उपयोग के लिए रखी जा सकती हैं। लेकिन पिछले कई वर्षों में यह देखा गया कि देशभर में बहुत सी वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं है। कई जगहों पर कब्जे, विवाद और गलत इस्तेमाल के मामले सामने आए। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में वक्फ अधिनियम में बड़ा संशोधन किया। इस संशोधन के तहत अब देश के सभी वक्फ बोर्डों को अपनी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जहाँ देशभर की सभी वक्फ संपत्तियों की जानकारी दर्ज होगी।
केंद्र सरकार का कहना है कि “नए कानून का उद्देश्य पारदर्शिता लाना, रिकॉर्ड स्पष्ट करना और संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वहीं दूसरी तरफ कुछ संगठनों और मुस्लिम नेताओं का मानना है कि इससे सरकार वक्फ मामलों में अपने अधिकार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से यह संशोधन शुरू से ही राजनीतिक और धार्मिक बहस का विषय बना हुआ है।”
बंगाल सरकार की भूमिका और बदलाव
जब यह संशोधन कानून पारित हुआ था। तब पश्चिम बंगाल ही वह राज्य था जिसने इसका सबसे अधिक विरोध किया। राज्य सरकार ने कहा था कि “यह कानून केंद्र सरकार द्वारा धार्मिक संपत्तियों में दखल देने का प्रयास है और इसे लागू करना राज्य के संघीय अधिकारों का उल्लंघन होगा।” लेकिन अब राज्य सरकार ने अपना रुख बदलते हुए आदेश जारी किया है कि 82,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का पूरा डेटा जिलों के स्तर पर इकट्ठा कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाए। इसके लिए हर जिले में अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि विवादित संपत्तियों को अभी इस सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। पहले साफ रिकॉर्ड वाली जमीनों का ही विवरण अपलोड किया जाएगा। इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए जिले-स्तर पर हेल्प डेस्क और बैठकें भी शुरू हो चुकी हैं।
क्यों बढ़ा विरोध और डर?
नए कानून में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें लेकर सबसे ज्यादा विवाद उठे। उदाहरण के तौर पर, अब वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को भी सदस्य बनाया जा सकता है। इससे वह समुदाय जो सदियों से वक्फ प्रबंधन खुद करता आया है, उसे लगता है कि सरकार अब धार्मिक मामलों को अपने नियंत्रण में लाना चाहती है।