दिल्ली-NCR पर हेली गुब्बी की राख का कितना असर हुआ? प्रदूषण बढ़ने को लेकर ये है अनुमान
इथियोपिया में हेली गुब्बी ज्वालामुखी फटने के बाद निकली राख का विशाल गुबार दिल्ली–एनसीआर के ऊपर से गुज़रकर चीन की ओर बढ़ गया है। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण पहले से ही काफी ज्यादा है। इसको लेकर तमाम प्रकार की आशंका जताई जा रही थी कि इसके घातक परिणाम हो सकते हैं। लेकिन यह राख काफी ऊंचाई पर होने के कारण राजधानी में न तो प्रदूषण बढ़ा और न ही विज़िबिलिटी पर इसका कोई असर दिखा।

अधिकारियों ने बताया कि राख लगभग 14 किलोमीटर (45,000 फीट) की ऊंचाई पर बनी रही, इसलिए इसका प्रभाव जमीन पर महसूस नहीं हुआ। मंगलवार को दिल्ली की विज़िबिलिटी पिछले कई दिनों के मुकाबले बेहतर रही और स्मॉग की परत हल्की नजर आई। हवा की गति सामान्य से अच्छी होने के कारण प्रदूषण में थोड़ी गिरावट देखी गई। यही वजह रही कि ज्वालामुखी की राख का गुबार गुजरने के बावजूद हवा की गुणवत्ता पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
AQI अभी भी 350 पार
सीपीसीबी के एयर बुलेटिन के अनुसार मंगलवार को दिल्ली का AQI घटकर 353 पर आ गया, जो पिछले सात दिनों में सबसे कम रहा। सुबह 10 बजे AQI स्तर 361 था। वहीं फरीदाबाद में 220, गाजियाबाद में 349, ग्रेटर नोएडा में 364, गुरुग्राम में 303 और नोएडा में 373 दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 26 से 28 नवंबर के बीच प्रदूषण स्तर फिर से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच सकता है।

12 हजार साल बाद फटा था ज्वालामुखी
इथियोपिया में हेली गुब्बी एक बहुत पुराना और शांत ज्वालामुखी है। यह इतना शांत था कि लोगों के पास इसका कोई रिकॉर्ड भी नहीं था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह फिर से फटेगा। लेकिन अचानक रविवार को यह जोरदार तरीके से फट गया। विस्फोट इतना तेज था कि पहाड़ के अंदर छिपी राख, धुआं और गैस आसमान में करीब 15 किलोमीटर ऊपर तक पहुंच गई। हवा का रुख ऐसा था कि यह राख इथियोपिया से निकलकर लाल सागर को पार करती हुई यमन और ओमान तक फैलती चली गई।
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