आसमान में राख का गुबार – राख भारत तक कैसे पहुंची जानें पूरी कहानी!

इथियोपिया में हेली गुब्बी एक बहुत पुराना और शांत ज्वालामुखी है । यह इतना शांत था, कि लोगों के पास इसका कोई रिकॉर्ड भी नहीं था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह फिर से फटेगा। लेकिन अचानक रविवार को यह जोरदार तरीके से फट गया। विस्फोट इतना तेज था, कि पहाड़ के अंदर छिपी राख, धुआं और गैस आसमान में करीब 15 किलोमीटर ऊपर तक पहुंच गई। हवा का रुख ऐसा था, कि यह राख इथियोपिया से निकलकर लाल सागर को पार करती हुई यमन और ओमान तक फैलती चली गई।
अनुमान ऐसा था कि राख पास के इलाकों तक ही रहेगी, लेकिन हवा बहुत तेज थी, इसलिए राख का गुबार लगातार आगे बढ़ता गया। सोमवार रात करीब 11 बजे यह राख भारत तक भी पहुंच गई। इथियोपिया से भारत सीधा 4300 किलोमीटर दूर है, फिर भी राख इतनी ऊंचाई पर थी कि हवा इसे खींच लायी । यह राख सबसे पहले राजस्थान के आसमान में दिखाई दी और फिर हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी यूपी और हिमाचल की तरफ बढ़ने लगी।
भारत पर असर कैसे पड़ा?
राख इतनी ऊंचाई पर है कि लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। यानी सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन या रोज़मर्रा की कोई दिक्कत बहुत कम होगी। सिर्फ हल्की राख गिरने की संभावना है, लेकिन यह भी बहुत मामूली मात्रा में होगी।
असल खतरा आसमान में उड़ने वाले जहाजों को है। हवाई जहाज आम तौर पर 30,000 से 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। यही ऊंचाई वह है जहां यह राख मौजूद है। इसलिए एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को तुरंत अलर्ट कर दिया गया।
उड़ानों पर क्या असर पड़ा?
राख का कण जब इंजन में जाता है तो वह गर्म होकर पिघल जाता है और इंजन के अंदर चिपक जाता है। इससे इंजन रुक सकता है या खराब हो सकता है। राख कांच को घिस देती है, जिससे पायलट को बाहर का दृश्य साफ नहीं दिखता। उड़ान के सेंसर भी खराब हो सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया में जब भी किसी ज्वालामुखी की राख आसमान में फैलती है, तो एयरलाइंस तुरंत सतर्क हो जाती हैं।
भारत में भी ऐसा ही हुआ। एयर इंडिया ने अपनी 11 उड़ानें रद्द कर दीं। अकासा एयर ने 24 और 25 नवंबर की अपनी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द किया। KLM ने भी दिल्ली आने वाली अपनी फ्लाइट रोक दी। कुछ उड़ानों के रूट बदले गए ताकि वे राख वाले हिस्से से न गुजरें। मुंबई एयरपोर्ट ने लोगों से कहा कि वे अपनी फ्लाइट का स्टेटस जांचकर ही एयरपोर्ट आएं, क्योंकि रूट और समय बदल सकता है।
DGCA ने क्या किया?
DGCA यानी भारत की एविएशन अथॉरिटी ने तुरंत सभी एयरलाइंस और एयरपोर्ट्स को चेतावनी जारी कर दी। इसे SIGMET कहा जाता है। यह एक तरह का मौसम अलर्ट है, जिसमें बताया जाता है कि आसमान के किस हिस्से में खतरा है और पायलट को क्या सावधानी रखनी चाहिए।
DGCA ने एयरलाइंस से कहा कि, राख वाले इलाकों से दूर उड़ान भरें। रूट और ऊंचाई बदल दें। अगर किसी विमान को थोड़ी भी राख दिखे या इंजन में कोई गड़बड़ी लगे, तो तुरंत रिपोर्ट करें। हालांकि, भारत में राख इतनी ऊंचाई पर है कि टेकऑफ और लैंडिंग पर कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है। फिर भी सावधानी बरती जा रही है।

ज्वालामुखी फिर फट सकता है?
वैज्ञानिकों को आशंका है कि ज्वालामुखी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। उन्होंने बताया, कि “जब अंदर दबाव बढ़ता है, तो पहाड़ से सल्फर डायऑक्साइड जैसी गैसें ज्यादा निकलने लगती हैं। यह गैस इस बार बहुत बड़ी मात्रा में बाहर आई है, जो बताती है कि अंदर अभी भी हलचल है। इसलिए आने वाले दिनों में एक और विस्फोट हो सकता है।”
वैज्ञानिकों के लिए यह घटना बहुत खास है, क्योंकि यह ज्वालामुखी हजारों साल बाद फटा है। अब वे समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने साल शांत रहने के बाद अचानक इसमें ऐसी उथल-पुथल क्यों हुई। यह इलाका अफार रिफ्ट में आता है, जो धरती की उन जगहों में से है जहां प्लेटें खिसकती रहती हैं। ऐसी जगहों पर ज्वालामुखी का व्यवहार थोड़ा अलग होता है, इसलिए वैज्ञानिकों के लिए भी नया होगा।
भारत में यह राख कब तक रहेगी?
मौसम विभाग ने बताया है कि यह राख भारत से शाम तक निकलकर चीन की ओर बढ़ जाएगी। इसका मतलब है कि भारत में इसका असर कुछ घंटों से ज्यादा नहीं रहेगा। राख बहुत ऊंचाई पर है और सामान्य लोगों को लगभग महसूस भी नहीं होगी।
हवा ने राख को कैसे खींचा?
जैसे गर्मियों में लू भारत से हवा को पाकिस्तान की तरफ ले जाती है, वैसे ही इस समय हवा का रुख पश्चिम से पूर्व की तरफ था। राख 30,000–35,000 फीट की ऊंचाई पर थी और इसी ऊंचाई पर हवा तेज चल रही थी। हवा ने राख को पहले ओमान और अरब सागर तक खींचा और फिर सीधे भारतीय आसमान में ला दिया। एयरक्राफ्ट का एयरफ्रेम डैमेज होता है. यह रडार पर साफ दिखता नहीं है, इसलिए खतरा अचानक बढ़ सकता है। 24 नवंबर यह राख भारत के ऊपर पहुंच गई यानि हवा ने राख को खींचकर अरब सागर से होते हुए भारत के ऊपर ला दिया। यह राख महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य भारत के एयर-रूट्स के पास से गुजर रही है।