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चीन गहरे समुद्र में बना रहा है ‘सीक्रेट शहर”! परमाणु हमला भी नहीं कर पाएगा बाल बांका

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चीन बना रहा है महासागर में Ultra-Secure फ्लोटिंग रिसर्च हब, 238 लोग रह सकेंगे महीनों तक सुरक्षित

चीन समुद्र के भीतर विज्ञान और सुरक्षा से जुड़ी अपनी क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। शंघाई जिओ टोंग विश्वविद्यालय की एक विशेषज्ञ टीम एक ऐसे बड़े समुद्री प्लेटफ़ॉर्म को विकसित कर रही है, जो न सिर्फ लगातार कई महीनों तक वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों को सुरक्षित रहने की सुविधा देगा, बल्कि इतना मजबूत भी होगा कि किसी भी धक्के, भारी तूफान, यहां तक कि परमाणु धमाके के प्रभाव को भी झेल सके। इस पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व प्रोफेसर यांग देकिंग कर रहे हैं। उनकी टीम के मुताबिक यह ढांचा गहरे पानी में काम करने वाली दुनिया की पहली ऐसी वैज्ञानिक सुविधा होगी, जहां मौसम कितना भी खराब हो। काम रुकने की नौबत नहीं आएगी। इसे इस तरह बनाया जा रहा है कि चाहे समुद्र कितना भी उग्र क्यों न हो, उसके अंदर मौजूद लोग सुरक्षित और सामान्य जीवन जी सकें।

 

एयरक्राफ्ट कैरियर की की जा रही तुलना

इस तैरते प्लेटफ़ॉर्म का आकार इतना बड़ा होगा कि इसकी तुलना चीन के फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर से की जा रही है। यानी यह एक छोटे शहर जैसा होगा, जिसमें रहने, रिसर्च, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा—सबकी व्यवस्था होगी। इसे दो बड़े फ्लोटिंग बॉडीज़ और एक अर्ध-पनडुब्बी जैसी संरचना के रूप में डिजाइन किया गया है, ताकि यह पानी में डुबते-उभरते हुए भी स्थिर बना रहे।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां लगभग 238 लोग बिना किसी अतिरिक्त सप्लाई के चार महीनों तक आराम से रह सकेंगे। इसमें ऊर्जा, पानी, नेविगेशन, संचार और आपातकालीन व्यवस्था पहले से ही शामिल होगी। यह समुद्री घर, प्रयोगशाला और सुरक्षा केंद्र—तीनों का मिश्रण होगा।

 

रमाणु धमाके का झटका भी सहन कर सकेगा

चीन का दावा है कि यह विशाल तैरता स्टेशन दुनिया में पहली बार बनाया जा रहा है, जिसे खास तौर पर इस तरह तैयार किया जा रहा है कि परमाणु धमाके का झटका भी इसके अंदर मौजूद लोगों को नुकसान न पहुंचा सके। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस प्लेटफ़ॉर्म के बाहरी हिस्सों में ऐसी तकनीक इस्तेमाल होगी, जो धमाके से पैदा होने वाले शॉकवेव को बेहद हल्के दबाव में बदल देती है। इस पूरी तकनीक को “मेटामटेरियल सैंडविच पैनल” कहा जा रहा है। यानि कई परतों से बना ऐसा ढांचा, जो ऊर्जा को फैलाकर खतरे को कम कर देता है।

यह समुद्री संरचना दिखने में किसी विशाल जहाज की तरह नहीं होगी, बल्कि एक स्थिर प्लॉटफॉर्म की तरह पानी की सतह पर टिकी रहेगी, और इसका मुख्य हिस्सा पानी की सतह से लगभग 45 मीटर ऊपर होगा। लंबाई लगभग 138 मीटर और चौड़ाई करीब 85 मीटर होगी। इसे देखकर कोई भी समझ सकता है कि यह सामान्य समुद्री संरचना नहीं, बल्कि तकनीक का सेंटर है, जिसे भविष्य के वैज्ञानिक मिशनों के लिए खास तरह से गढ़ा जा रहा है। परियोजना के एक अन्य प्रमुख विशेषज्ञ लिन झोंगकिन ने बताया कि उनकी टीम दिन-रात इस संरचना को पूरा करने में लगी है। उनका कहना है कि 2028 तक इसे समुद्र में भेजकर संचालन शुरू करने का लक्ष्य है। यानी अगले कुछ वर्षों में समुद्र के बीच एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म खड़ा होगा, जो अपनी क्षमता और संरचना के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बन सकता है।

 

ऊंची ऊंची लहरों को भी झेल सकता है

इस तैरते वैज्ञानिक केंद्र को कई तरह की समुद्री चुनौतियों का सामना करने के लिए बनाया जा रहा है। यह 6–9 मीटर ऊंची विशाल लहरों के बीच भी सुरक्षित रहेगा। इतना ही नहीं, इसे उन तूफानों का भी सामना करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिन्हें श्रेणी 17 का कहा जाता है। जो दुनिया के सबसे भयानक उष्णकटिबंधीय चक्रवात माने जाते हैं।

समुद्र की उथल-पुथल, तेज हवाएं और अचानक उठने वाली ऊंची तरंगें भी इसकी स्थिरता को प्रभावित नहीं कर पाएंगी। प्रोफेसर यांग देकिंग की टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि इस संरचना के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण कक्ष विशेष प्रकार की सुरक्षा तकनीक से बनाए जा रहे हैं। इन कक्षों में ऊर्जा बैकअप, संचार व्यवस्था और नेविगेशन नियंत्रण की प्रणाली होगी। इन सभी जगहों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी भी तरह की गंभीर दुर्घटना या धमाके के समय ये हिस्से सबसे सुरक्षित रहेंगे। इसी कारण यह कहा जा रहा है कि इस पूरे समुद्री केंद्र को परमाणु धमाकों के प्रभाव से भी बचाने की क्षमता दी जा रही है।

 

चीन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देगा

यह प्रोजेक्ट सिर्फ सुरक्षा या वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए ही नहीं है, बल्कि चीन इसे समुद्र में अपनी लंबी मौजूदगी और तकनीकी प्रभाव को बढ़ाने के साधन के रूप में भी देख रहा है। इसे “सागर में तैरता मोबाइल रिसर्च स्टेशन” कहा जा रहा है, जिसे बनाने की तैयारी लगभग एक दशक से चल रही थी। शोध, परीक्षण और डिजाइन के बाद अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस समुद्री केंद्र में कई उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जो सामान्य समुद्री संरचनाओं में नहीं देखी जाती। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह न सिर्फ कठिन मौसम बल्कि अत्यधिक थ्रेट वाले माहौल में भी काम कर सकता है। यानी यह साधारण रिसर्च स्टेशन नहीं, बल्कि एक हाई-टेक सुरक्षा और वैज्ञानिक शोध का संयुक्त प्लेटफ़ॉर्म है, जहां महीनों तक लोग रहकर महासागर, मौसम, समुद्री ऊर्जा, समुद्री खनिज और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में रिसर्च कर सकेंगे।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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