तेजस्वी के करीबी सहयोगियों पर परिवार तोड़ने के आरोप — घर छोड़ते समय रोहिणी बोलीं, “मेरा कोई परिवार नहीं, नाम लेने पर मिलती हैं गालियाँ।”

बिहार की सियासत में लालू प्रसाद यादव का परिवार हमेशा से एक बड़ा और प्रभावशाली राजनीतिक घराना माना जाता रहा है। लेकिन इस बार हालात बिल्कुल बदलते नजर आ रहे हैं। तेजस्वी यादव के कमजोर चुनावी प्रदर्शन, RJD की हार और अब परिवार के भीतर बढ़ते मतभेद—इन सबने मिलकर बड़ा राजनीतिक भूचाल ला दिया है।
सबसे ज्यादा चर्चा लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की अचानक की गई घोषणा की है, जिसमें उन्होंने राजनीति छोड़ने और अपने ही परिवार से नाता तोड़ने की बात कही। यह बयान इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि रोहिणी ने कुछ साल पहले अपने पिता को किडनी दान कर उनकी जान बचाई थी।
चर्चाओं के केंद्र में दो नाम — संजय यादव और रमीज़ नेमत खान
तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल संजय यादव और उनके करीबी दोस्त रमीज़ नेमत खान पर परिवार और पार्टी में दरार डालने के आरोप लगातार लग रहे हैं।
तेज प्रताप यादव पहले भी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि कुछ लोग परिवार तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अब रोहिणी आचार्य ने भी इसी बात को दोहराया है। यह पहला मौका है जब लालू परिवार की अंदरूनी नाराजगी सीधे राजनीति के मंच पर सामने आई है।
कौन हैं रोहिणी आचार्य?
रोहिणी राजनीति में सक्रिय रहती हैं और सोशल मीडिया पर बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके पति राव समरेश सिंह अमेरिका में कंप्यूटर इंजीनियर हैं। दोनों की कुल घोषित संपत्ति करीब 36 करोड़ रुपये है।
अपने पिता को किडनी देकर उन्होंने पूरे देश में एक मिसाल पेश की थी।
रोहिणी का भावुक बयान
कुछ दिनों से रोहिणी पटना में राबड़ी देवी के घर रह रही थीं, लेकिन अचानक घर छोड़कर सीधे एयरपोर्ट चली गईं। वहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा—
“मेरा कोई परिवार नहीं है। अगर संजय यादव का नाम लिया तो गालियाँ दी जाएंगी, चप्पल उठाकर मार दिया जाएगा।”
इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया—
“मैं राजनीति छोड़ रही हूं और परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे ऐसा करने को कहा।”

कौन हैं रमीज़ नेमत खान?
रमीज़ तेजस्वी यादव के सबसे करीबी लोगों में माने जाते हैं। वह तेजस्वी की कैंपेन टीम, सोशल मीडिया रणनीति और राजनीतिक योजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
लेकिन उनके नाम पर कई विवाद जुड़े रहे हैं—
- हत्या के गंभीर आरोप
- रंगदारी के मामले
- टिकट बेचने के आरोप
- राजनीतिक प्रभाव का गलत उपयोग
हालांकि, वे इन मामलों में जमानत पर बाहर हैं, लेकिन परिवार के कई सदस्य मानते हैं कि तेजस्वी की नजदीकी ने उन्हें अत्यधिक शक्ति दे दी, जो कई विवादों की जड़ बन गई।

कौन हैं संजय यादव?
संजय यादव RJD कोटे से राज्यसभा सांसद हैं और तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद लोगों में गिने जाते हैं।
रोहिणी का कहना है कि संजय यादव का पार्टी और परिवार पर इतना नियंत्रण है कि उनके खिलाफ बोलना मुश्किल है। बिहार अधिकार यात्रा के दौरान एक सीट को लेकर हुआ विवाद इस तनाव को और बढ़ाने वाला था।
तेज प्रताप और रोहिणी एक ही पाले में?
तेज प्रताप यादव कई बार मंच से बोल चुके हैं कि “परिवार में कुछ जयचंद हैं।” वे सीधे संजय यादव का नाम लेकर आरोप लगाते रहे हैं कि RJD पर कब्ज़ा कर लिया गया है।
अब रोहिणी भी वही आरोप दोहराती दिख रही हैं। तेज प्रताप को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निकाला गया था और उन्होंने नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा—लेकिन हार गए।
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