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बिहार चुनाव में कैसा रहा सेलिब्रिटी उम्मीदवारों का प्रदर्शन? मैथिली से लेकर खेसारी लाल की सीट का क्या रहा नतीजा!

बिहार चुनाव में कैसा रहा सेलिब्रिटी उम्मीदवारों का प्रदर्शन? मैथिली से लेकर खेसारी लाल की सीट का क्या रहा नतीजा!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने साफ कर दिया कि इस बार सेलिब्रिटी उम्मीदवारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, जबकि पारंपरिक राजनीति की पकड़ कई प्रमुख सीटों पर मजबूत बनी रही। भोजपुरी और लोकसंगीत जगत से आए कई चेहरे मैदान में उतरे थे, जिन पर पूरे राज्य की नज़र थी। लेकिन हर स्टार को जनता का आशीर्वाद समान रूप से नहीं मिल पाया। अलीनगर और छपरा जैसी सीटें इस बार विशेष ध्यान में रहीं, वहीं हाई-प्रोफाइल मोकामा सीट ने एक बार फिर अपनी परंपरागत राजनीति की पहचान को बरकरार रखा।

अलीनगर पर मैथिली की जीत

Maithili Thakur

अलीनगर सीट पर पहली बार चुनाव लड़ रहीं लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने अपनी भारी लोकप्रियता को वोट में बदलते हुए शानदार जीत दर्ज की। भाजपा प्रत्याशी मैथिली ने 84 हजार से अधिक वोट हासिल किए, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी RJD के बिनोद मिश्रा करीब 73 हजार वोटों तक सीमित रहे। लगभग 11 हजार से ज्यादा वोटों का अंतर उनके पक्ष में गया, जिसने उन्हें इस चुनाव का सबसे चर्चित युवा चेहरा बना दिया। यह जीत साबित करती है कि स्टार छवि के साथ यदि मजबूत संगठन और पैठ जुड़ जाए तो नतीजा बेहद प्रभावी हो सकता है।

खेसारी की हुई हार

Khesari Lal Yadav

दूसरी ओर भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की चुनावी एंट्री उतनी सफल नहीं रही। खेसारी ने RJD के टिकट पर छपरा सीट से अपना राजनीतिक डेब्यू किया था और तेजस्वी यादव ने उनके लिए कई सभाएँ भी की थीं। लेकिन वोटों की गिनती शुरू होते ही वह लगातार पीछे चलने लगे। BJP प्रत्याशी छोटी कुमारी ने उन्हें बड़े अंतर से पछाड़ दिया।

खेसारी की हार यह संकेत है कि केवल नाम और लोकप्रियता पर्याप्त नहीं—ज़मीनी नेटवर्क और स्थायी राजनीतिक भरोसा भी बेहद अहम होता है।

रितेश पांडे का नहीं चला जादू

Ritesh Pandey

भोजपुरी गायक रितेश पांडे भी इस चुनाव में चर्चा में रहे, लेकिन उनका प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में वह पूरे अभियान में सक्रिय दिखे, पर मतदाताओं का समर्थन उनकी ओर अधिक आकर्षित नहीं हुआ। शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम नतीजों तक रितेश पिछड़ते रहे और सीट पर मुख्य लड़ाई अन्य दलों की ही बनी रही।

अनंत सिंह ने दर्ज की जीत

Anant Singh Mokama

इधर पटना की हाई-प्रोफाइल मोकामा सीट पर रोमांच चरम पर रहा, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक ही आया। जेडीयू के बाहुबली नेता अनंत सिंह ने एक बार फिर अपनी सीट बचाते हुए RJD की वीणा देवी को 28 हजार से अधिक वोटों से हराया। जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने के बावजूद उन्होंने मोकामा में अपनी वर्षों पुरानी पकड़ का मजबूत प्रदर्शन किया।

मोकामा को लंबे समय से “अनंत सिंह का गढ़” कहा जाता है और इस बार के नतीजों ने इसे फिर साबित कर दिया।

निष्कर्ष

इन चुनाव नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार की जनता सेलिब्रिटी चेहरों को मौका तो देती है, लेकिन केवल लोकप्रियता के आधार पर वोट नहीं करती। जहां मैथिली ठाकुर जैसी प्रतिभाएँ प्रभाव और जमीन दोनों का संतुलन बना पाती हैं, वहीं कई अन्य सितारों को राजनीतिक अनुभव और स्थानीय आधार की कमी भारी पड़ती है। साथ ही, मोकामा जैसे क्षेत्रों ने यह संदेश भी दे दिया कि पारंपरिक सत्ता समीकरण अभी भी अपनी पूरी ताकत के साथ कायम हैं।

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Shashwat Srijan

Content Writer

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