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महिलाओं की रिकॉर्ड वोटिंग ने कैसे बदला बिहार चुनाव का पूरा समीकरण ! जीविका दीदी’ और ‘शराबबंदी’ बनीं एनडीए का ब्रह्मास्त्र!

महागठबंधन

महागठबंधन की रणनीति उम्मीद के मुताबिक असर नहीं दिखा पाई! दो चरणों की वोटिंग में 66.91% मतदान, महिला वोट इस बार निर्णायक साबित हुए।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गिनती अपने अंतिम चरण में है। रुझान साफ बताते हैं कि जनता इस बार बड़े अंतर से सत्ता वापसी कराने का मन बना चुकी है। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, एनडीए का ग्राफ बढ़ रहा है , जबकि महागठबंधन को बमुश्किल 30-35 सीट ही मिलती दिख रही।

मतदान में महिलाओं की बड़ी भागीदारी

इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि महिलाओं ने इस बार मतदान में पुरुषों को बहुत पीछे छोड़ दिया। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दो चरणों में कुल मतदान 66.91% दर्ज किया गया था। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि महिलाओं ने पुरुषों से लगभग 10% ज़्यादा वोटिंग की।

  • महिला मतदान – 71.6%
  • पुरुष मतदान – 62.8%

इस आंकड़े से साफ हो जाता है कि महिलाओं ने बिहार के चुनाव पर जबरदस्त असर डाला है।

महिलाओं की वोटिंग क्यों झुकी एनडीए की ओर?

इस सवाल का जवाब राज्य की उन योजनाओं में छिपा है जो नीतीश कुमार की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं को ध्यान में रखकर चलाईं। कई सामाजिक और आर्थिक योजनाओं ने महिलाओं पर सीधा प्रभाव डाला और उनमें सुरक्षा व आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत किया।

आइए समझते हैं क्या रहा इसका सबसे बड़ा योगदान—

  •  जीविका दीदी योजना – महिलाओं को मिला आर्थिक संबल

चुनाव से पहले जिस योजना ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी, वह थी जीविका दीदी योजना। इस कार्यक्रम के तहत राज्य की 1.30 करोड़ से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।

यह योजना सितंबर से लेकर अक्टूबर तक चली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे शुरू किया था। इसके बाद 25 लाख और महिलाओं को वही आर्थिक लाभ मिला। रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना काफी लोकप्रिय रही। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति तो सुधरी ही, साथ ही उनमें सरकार के प्रति भरोसा भी बढ़ा। यही भरोसा अब वोट में तब्दील होता हुआ दिख रहा है।

  • शराबबंदी ने बढ़ाई नीतीश कुमार की लोकप्रियता

2016 में लागू की गई शराबबंदी शुरू से ही बिहार में एक भावनात्मक मुद्दा रही है। खासकर महिलाओं के बीच इसकी स्वीकार्यता बहुत ज्यादा थी, क्योंकि घरेलू हिंसा, झगड़े और परिवारिक तनाव जैसी समस्याओं में शराब का बड़ा योगदान था।

शराबबंदी के बाद महिलाओं को घर में शांति महसूस हुई और परिवार का माहौल सुधरा। इसी वजह से नीतीश कुमार महिलाओं के लिए ‘लाड़ले नेता’ की तरह उभरे। कई गांवों में आज भी महिलाएं खुले तौर पर कहती हैं कि शराबबंदी ने उनके घर बचाए हैं। यही कारण है कि महिला वोटरों का झुकाव एनडीए की तरफ बहुत अधिक देखा गया।

  • बालिका साइकिल योजना—एक पुरानी योजना, पर असर आज भी

2006 में शुरू की गई मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना को बिहार की राजनीति का गेमचेंजर कहा जाता है। यह योजना उन लड़कियों के लिए वरदान बनकर आई थी जिन्हें स्कूल दूर होने की वजह से पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी।

लड़कियों को साइकिल और यूनिफॉर्म देकर पढ़ाई जारी रखने में मदद दी गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि लड़कियों में पढ़ाई का प्रतिशत बढ़ा और आगे चलकर उन्होंने नौकरी, कॉम्पिटिशन परीक्षा और सामाजिक स्तर पर बेहतर पहचान बनाई।

जो लड़कियाँ उस समय इस योजना की लाभार्थी थीं, उनमें से कई आज युवा महिला मतदाता बन चुकी हैं। इसलिए यह योजना लंबे समय तक नीतीश कुमार के लिए वोट बैंक तैयार करने में सहायक साबित हुई।

  • एग्जिट पोल के अनुसार

चुनाव से पहले ही कई एग्जिट पोल ने अनुमान लगाया था। कि महिलाएं इस बार निर्णायक भूमिका निभाएंगी और एनडीए को भारी फायदा होगा। रुझानों में दिखाई दे रही एनडीए की बढ़त बिल्कुल उसी दिशा की पुष्टि करती है।

ओबीसी और ईबीसी समुदायों के बीच भी एनडीए को अच्छा समर्थन मिला है, जो इसके मजबूत प्रदर्शन का एक और प्रमुख कारण है।

 

महागठबंधन क्यों पिछड़ा ?

इसके कई कारण बताए जा रहे हैं—

  1. महिला वोटरों में पकड़ कमजोर।
  2. सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जनता का उत्साह पहले जैसा नहीं।
  3. गठबंधन की अंदरूनी खींचतान।
  4. उम्मीदवार चयन में असंतुलन।
  5. प्रचार रणनीति में कमजोर पकड़।

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Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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