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बिहार चुनाव रुझान एनडीए फिर सत्ता की ओर! कांग्रेस -राजद का प्रदर्शन चौंकाने वाला

बिहार चुनाव

सत्ता की डोर एक बार फिर एनडीए के हाथों में जाती दिख रही है। सुबह से जारी गिनती में भाजपा, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास) और अन्य सहयोगी दल लगातार बढ़त!

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बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आए हैं, लेकिन शुरुआती रुझानों ने यह साफ संकेत है कि राज्य की सत्ता की डोर एक बार फिर एनडीए के हाथों में जाती दिख रही है। सुबह से जारी गिनती में भाजपा, जेडीयू, एलजेपी (रामविलास) और अन्य सहयोगी दल लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। इस बार के चुनाव में जिस तरह गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चली थी, उसके बीच जनता का रुझान खास मायनों में अहम हो जाता है।

अब तक क्या तस्वीर बन रही है?

रुझानों के आधार पर एनडीए इस समय मजबूत स्थिति में है। अलग-अलग पार्टियों की बढ़त इस प्रकार दिखाई दे रही है:

  • बीजेपी – 85 सीटों पर आगे
  • जेडीयू – 75 सीटों पर बढ़त
  • एलजेपी (रामविलास) – 22 सीटों पर आगे
  • एचएएम – 4 सीटों पर बढ़त
  • आरएलएम – 2 सीटों पर आगे

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो एनडीए आराम से बहुमत के आंकड़े को पार कर लेगा और फिर से सरकार बना लेगा।

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इस बार समीकरण और रणनीति क्या रही?

2025 के चुनाव में एनडीए के भीतर सीटों का बंटवारा काफी सोच-समझकर किया गया। भाजपा और जेडीयू ने बराबर-बराबर 101–101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। इनके साथ सहयोगी दलों में जेडीयू (अन्य गुट) को 29, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (एचएएम) को 6 और आरएलएम को भी 6 सीटें मिलीं।

महागठबंधन की स्थिति क्या है?

विपक्षी गठबंधन, यानी महागठबंधन, भी मैदान में पूरी ताकत के साथ उतरा था। इनके प्रमुख दलों ने इस बार इस तरह उम्मीदवार उतारे थे

  • आरजेडी – 143 सीटें
  • कांग्रेस – 60 सीटें
  • सीपीआई (माले) – 20
  • वीआईपी – 11
  • सीपीआई – 6
  • सीपीएम – 4

रुझानों के अनुसार इन दलों का प्रदर्शन इस प्रकार दिख रहा हैं

  • आरजेडी –  36 सीटों पर आगे
  • कांग्रेस –  6 सीटों पर बढ़त
  • लेफ्ट पार्टियां – कुल 8 सीटों पर आगे
  • वीआईपी – 1 सीट पर बढ़त

 

पिछले चुनाव में किन दलों का प्रदर्शन कैसा रहा था?

बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 110 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और करीब 19.5 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। इसके दम पर उसे 74 सीटें मिली थीं। जेडीयू, जो एनडीए की प्रमुख पार्टियों में से एक थी, 122 सीटों पर चुनाव लड़कर लगभग 15.4 प्रतिशत वोटों के साथ 43 सीटें जीत पाई थी।

चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने पिछली बार अलग राह पकड़ ली थी। और 135 सीटों पर दांव लगाया था। लेकिन नतीजे उम्मीद से बिल्कुल उलटे रहे। पार्टी केवल एक सीट पर सिमट गई थी। उस समय इसे एलजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक झटका माना गया था। एलजेपी (रामविलास), जो पिछली बार एनडीए से अलग लड़कर लगभग खाली हाथ लौटी थी, इस बार एनडीए का हिस्सा बनी और नए सिरे से चुनावी मैदान में उतरी। इस फैसले का असर अब रुझानों में साफ दिखाई दे रहा है। हालाँकि, महागठबंधन की कोशिश थी। कि युवाओं, बेरोज़गारी और रोजगार के सवालों को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाया जाए, लेकिन शुरुआती रुझान कहते हैं। कि जनता ने इस बार भी स्थिरता और विकास को प्राथमिकता दी है।

बिहार में इस बार भी चुनावी वादों की भरमार थी। लेकिन परिणामों के शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि जनता ने उन दलों पर भरोसा जताया है जिनके साथ वे पिछले कई वर्षों से जुड़ी रही है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला विकास मॉडल, केंद्रीय योजनाओं का असर और एनडीए की संयुक्त रणनीति ने मतदाताओं पर प्रभाव छोड़ा है।

Anushka Pandey

Content Writer

Anushka Pandey as a Anchor and Content writer specializing in Entertainment, Histroical place, and Politics. They deliver clear, accurate, and engaging content through a blend of investigative and creative writing. Bagi brings complex subjects to life, making them accessible to a broad audience.

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