जांच में सामने आया बड़ा खुलासा—मुंबई, दिल्ली और फरीदाबाद से जुड़े मॉड्यूल की प्लानिंग अंकारा से होती थी; गिरफ्तार डॉक्टरों के मोबाइल में मिली चैट्स और तुर्किये यात्रा के सबूत; तुर्किये ने आतंक से जुड़े आरोपों को बताया बेबुनियाद।

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को अब एक बड़ा सुराग मिला है। पुलिस और एनआईए की शुरुआती जांच में पता चला है कि इस आतंकी हमले के पीछे सिर्फ स्थानीय नेटवर्क नहीं, बल्कि विदेशी हैंडलर का भी हाथ था।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों का संपर्क तुर्किये की राजधानी अंकारा में बैठे एक विदेशी व्यक्ति से था, जो “उकासा (Ukasa)” नाम से काम कर रहा था। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह असली नाम नहीं, बल्कि पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किया गया कोडनेम है। “उकासा” शब्द अरबी भाषा का है, जिसका मतलब होता है “मकड़ी” यानी ऐसा व्यक्ति जो अपने जाल में सबको फंसा ले।
तुर्किये से चल रही थी साजिश
सूत्रों ने बताया कि “उकासा” अंकारा से बैठकर आरोपियों की हर गतिविधि पर नजर रखता था। वही उनसे बात करता था, उन्हें निर्देश देता था और पैसे की व्यवस्था भी उसी की ओर से होती थी।
आरोपियों ने उससे बात करने के लिए सेशन (Session) नामक एक एन्क्रिप्टेड एप का इस्तेमाल किया, जिसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है। इसी एप के जरिए वह भारत में अपने साथियों को संदेश भेजता और हमले की तैयारी से जुड़ी सूचनाएं साझा करता था।
जांच में सामने आया है कि उकासा न सिर्फ फंडिंग करता था बल्कि आरोपियों को कट्टर विचारधारा फैलाने के लिए भी प्रेरित करता था। वह सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ युवाओं को इस दिशा में प्रभावित कर रहा था।

तुर्किये सरकार ने किया खंडन
इस बीच, जब मीडिया रिपोर्टों में यह खबर आई कि दिल्ली धमाके का तुर्किये से संबंध है, तो तुर्किये की सरकार ने इसे पूरी तरह “झूठा और दुष्प्रचार” बताया।
तुर्किये के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा, “हम हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ हैं, चाहे वह कहीं भी और किसी के द्वारा किया गया हो। भारत या किसी अन्य देश में तुर्किये के हाथ होने की बात पूरी तरह गलत और तथ्यहीन है।” सरकार के अनुसार, “ऐसी रिपोर्टों का मकसद दोनों देशों के आपसी रिश्तों को नुकसान पहुंचाना है। तुर्किये ने जोर देकर कहा कि “वह आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहा है।”
मुख्य आरोपी कौन
जांच एजेंसियों ने पाया कि मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी और डॉ. मुजम्मिल गनी इस साल जनवरी में तुर्किये गए थे। उनके पासपोर्ट पर यात्रा के टिकट और स्टैंप भी मिले हैं। एजेंसियों को शक है, कि इसी यात्रा के दौरान दोनों की मुलाकात “उकासा” या उसके किसी साथी से हुई थी। जिसने उन्हें आगे की योजना बनाने के लिए तैयार किया।
वापस लौटने के बाद दोनों ने दिल्ली में लाल किले क्षेत्र की कई बार रेकी की थी। पुलिस को उनके मोबाइल डेटा से पता चला कि उन्होंने जनवरी महीने में कई बार लाल किले के आसपास की तस्वीरें खींची थीं और सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया था। अधिकारियों के मुताबिक, उस समय उनकी योजना थी। कि गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले पर हमला किया जाए, लेकिन भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण यह साजिश नाकाम रह गई।

6 दिसंबर को फिर रची गई नई साजिश
जांच में यह भी सामने आया है कि नाकाम होने के बाद आतंकियों ने नया प्लान बनाया। उन्होंने 6 दिसंबर, यानी बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के दिन दिल्ली में हमला करने की तैयारी की थी। इस पूरी योजना की कमान डॉ. उमर नबी के हाथ में थी, जबकि उसके सहयोगी डॉ. मुजम्मिल गनी ने तकनीकी सहायता और विस्फोटक जुटाने का काम संभाला था। हालांकि मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद यह योजना विफल हो गई।
अब तक कुल 8 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें 6 डॉक्टर शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं। यह आतंकी मॉड्यूल यहीं से सक्रिय था। श्रीनगर निवासी एक और संदिग्ध, डॉ. निसार, फिलहाल फरार है। बताया जा रहा है कि वह डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर का अध्यक्ष था। जम्मू-कश्मीर सरकार ने उसकी सेवा समाप्त कर दी है।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा
जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आरोपी डॉ. मुजम्मिल गनी फरीदाबाद में किराए के एक कमरे में विस्फोटक सामग्री जमा कर रहा था। उसने मकान मालिक और पड़ोसियों को यह कहकर भ्रमित किया कि वह खाद की बोरियां रख रहा है, जिन्हें कश्मीर भेजना है।
करीब 20 दिन पहले वह कुछ बोरियां लेकर आया था। जब पड़ोसियों ने पूछा कि इसमें क्या है, तो उसने कहा कि ये “खाद के कट्टे” हैं। लेकिन पुलिस जांच में पाया गया कि उन्हीं बोरियों में विस्फोटक रसायन और वायरिंग सामग्री छिपाई गई थी।
उस कमरे से करीब 100 मीटर दूर एक मकान में लगे CCTV कैमरों में गनी कई बार संदिग्ध सामान ले जाते हुए दिखाई दिया है। पुलिस ने फुटेज जब्त कर लिए हैं। और जांच जारी है।
तीन बड़े खुलासे – एक नज़र में
- जनवरी में लाल किले की रेकी आरोपियों ने कई बार लाल किले के आसपास जाकर तस्वीरें लीं और भीड़ व सुरक्षा पैटर्न को समझा।
- 6 दिसंबर को धमाके की योजना दिल्ली को दहलाने की साजिश बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के दिन रची गई थी।
- फरीदाबाद से विस्फोटक जुटाना डॉ. मुजम्मिल गनी खाद के नाम पर विस्फोटक सामग्री इकट्ठा कर रहा था, ताकि हमले में उसका इस्तेमाल किया जा सके।
जांच एजेंसियां की पड़ताल जारी
अब जांच एजेंसियां इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं कि “उकासा” कौन है। और क्या वह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है। साइबर सेल की टीम सेशन ऐप की डिजिटल ट्रैकिंग कर रही है ताकि अंकारा से भेजे गए संदेशों के स्रोत तक पहुँचा जा सके। एनआईए के अधिकारी मानते हैं। कि यह मॉड्यूल अपने आप में “खतरनाक और संगठित” था, क्योंकि इसमें शिक्षित वर्ग के लोग शामिल थे, जिनका मकसद देश के भीतर दहशत फैलाना था।
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