आरोपों में घिरे और 100 करोड़ रुपए की कथित बेनामी संपत्ति के आरोप — ऋषिकांत शुक्ला ने खुद को बताया निर्दोष

कानपुर के निलंबित डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। करीब एक हफ्ते से 100 करोड़ रुपए की कथित बेनामी संपत्ति के आरोपों में घिरे शुक्ला ने एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष सार्वजनिक किया। इस वीडियो में उन्होंने खुद को “माफिया और अपराधियों की साजिश का शिकार” बताया और कहा कि उनके खिलाफ फैलाए जा रहे सभी आरोप झूठे और निराधार हैं।
“मेरी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है”
वीडियो संदेश में डीएसपी शुक्ला ने साफ कहा कि यह पूरा मामला उनके खिलाफ रची गई साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “जिन माफिया और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ मैंने कार्रवाई की, वही अब मुझे बदनाम करने में लगे हैं। मेरा नाम घसीटकर मेरी ईमानदारी और करियर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।”
शुक्ला ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई खतरनाक गैंग्स के खिलाफ मोर्चा खोला था। “मैंने बीटू गैंग को खत्म किया, जो एसटीएफ के धर्मेंद्र सिंह की हत्या में शामिल था। मुन्ना बजरंगी गैंग के शूटरों का एनकाउंटर कराया और ड्रग्स माफिया पर नकेल कसी,” उन्होंने कहा।
शुक्ला के मुताबिक, इन्हीं माफिया नेटवर्क्स ने अब उनके खिलाफ झूठे आरोप फैलाने का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ जो भी रिपोर्ट तैयार की गई है, उसमें कई तथ्य तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए हैं।
अखिलेश दुबे से रिश्ता सिर्फ ‘लीगल सलाह’ तक सीमित था
हाल ही में सामने आई जांच रिपोर्टों में शुक्ला का नाम अखिलेश दुबे नाम के एक शख्स से जुड़ा बताया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह संबंध पेशेवर था, न कि व्यक्तिगत।
उन्होंने बताया, “जब मैं कानपुर में तैनात था, तब कई बार कानूनी सलाह की जरूरत पड़ने पर मैंने अखिलेश दुबे से बात की। वे एक लीगल एडवाइजर थे और पुलिस विभाग को भी कई मामलों में मार्गदर्शन देते थे। इसके अलावा मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत या आर्थिक रिश्ता नहीं था। अब इस संबंध को साजिश के तहत तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।”
डीएसपी का कहना है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने इस रिश्ते को गलत ढंग से पेश किया, जिससे जनता के बीच उनके खिलाफ नकारात्मक धारणा बनी। उन्होंने अपील की कि जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगा।
ऋषिकांत शुक्ला ने कहाँ
वीडियो में शुक्ला ने कई पुराने आपराधिक मामलों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि “अपने करियर में उन्होंने ऐसे कई गैंग्स के खिलाफ कार्रवाई की, जिनका अपराध जगत में बड़ा नेटवर्क था। उन्होंने कहा, “मैंने कई बार जान जोखिम में डालकर माफिया गिरोहों पर शिकंजा कसा। इन गैंग्स में ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी जड़ें राजनीति और व्यापार तक फैली हैं। अब वही लोग मेरे खिलाफ झूठे सबूत बनाकर साजिश रच रहे हैं।”
शुक्ला ने विशेष तौर पर मनोहर शुक्ला का नाम लिया, जो कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला का रिश्तेदार बताया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनोहर और उसके सहयोगी उनके खिलाफ झूठी कहानियां गढ़कर मीडिया तक पहुँचा रहे हैं, ताकि उनके वर्षों की मेहनत और साख मिट्टी में मिल जाए।
पूर्व पुलिस कमिश्नर को गुमराह किया गया
अपने बयान में शुक्ला ने यह भी कहा कि पूरे मामले में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को गलत जानकारी दी गई। उनका कहना है कि पूर्व पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार को कुछ लोगों ने गुमराह किया, जिसके कारण उन्होंने गलत रिपोर्ट शासन को भेज दी। उन्होंने कहा, “अगर मुझे अपनी बात रखने का अवसर मिला होता, तो मैं तथ्यों और दस्तावेजों के साथ साबित कर देता कि मेरे खिलाफ लगाए गए सारे आरोप गलत हैं। मुझे न तो एसआईटी से कोई औपचारिक नोटिस मिला है और न ही कोई व्यक्तिगत पूछताछ हुई है। जांच की प्रक्रिया पूरी होने पर सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।”
शासन पर जताया भरोसा
वीडियो के अंत में डीएसपी शुक्ला ने सरकार और जांच एजेंसियों पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और उम्मीद करते हैं कि न्याय प्रणाली पर उनका विश्वास कायम रहेगा।
“मैंने हमेशा ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाई है। अगर मुझसे कोई गलती हुई होती, तो मैं सामने आकर स्वीकार करता। लेकिन इस बार जो कुछ हो रहा है, वह संगठित अपराधियों की चाल है। मुझे पूरा विश्वास है कि शासन मुझे निष्पक्ष सुनवाई का मौका देगा।”
शुक्ला का कहना है कि उनके खिलाफ फैलाई जा रही अफवाहों से उनका और उनके परिवार का मानसिक संतुलन प्रभावित हुआ है। बावजूद इसके, वे अपने बचाव में कानूनी कदम उठाने को तैयार हैं।
कौन हैं ऋषिकांत शुक्ला?
डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला को सख्त कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। उन्होंने कानपुर, लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पोस्टिंग के दौरान अपराधियों के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ हाल में जांच तब शुरू हुई, जब विभाग को उनकी कथित संपत्तियों के बारे में शिकायतें मिलीं।
जांच में सामने आया कि शुक्ला के नाम से जुड़े कुछ बेनामी संपत्ति सौदे 100 करोड़ रुपए तक के हैं। इसी के बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर एसआईटी जांच के आदेश दिए। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।