राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया उत्तराखंड विधानसभा को संबोधित, क्या संसद के अलावा विधानसभा को
संबोधित कर सकते है ?

देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापनाके 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमवार से विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने रजत जयंती समारोह के तहत 3 और 4 नवंबर को यह विशेष सत्र बुलाया है। सत्र का आरंभ पूर्वान्ह 11 बजे हुआ, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यवाही प्रारंभ हुई।
दूसरा अवसर, जब राष्ट्रपति ने किया विशेष सत्र को संबोधित
यह दूसरा अवसर है जब किसी राष्ट्रपति ने उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया है।
इससे पहले 18 मई 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया था। राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन को लेकर पूरे राज्य में उत्साह का माहौल है।
विधानसभा में हुआ एजेंडे पर अंतिम निर्णय
रविवार को विधानसभा भवन के सभागार में हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सत्र के एजेंडे को अंतिम रूप दिया गया।बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा विधानमंडल दल की बैठक की,उन्होंने मंत्रियों और विधायकों के साथ सत्र की रूपरेखा पर चर्चा की।सीएम धामी ने कहा —
“रजत जयंती वर्ष का यह ऐतिहासिक सत्र हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिभाषण राज्य की विकास यात्रा में नई ऊर्जा भरेगा।
राष्ट्रपति के संबोधन से पहले स्वागत भाषणों की श्रृंखला
सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूड़ी ने राष्ट्रपति के सम्मान में स्वागत भाषण दिया। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य को संबोधित किया।
सत्र में चर्चा होगी राज्य की 25 साल की उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप पर
उत्तराखंड शासन ने विशेष सत्र के लिए पहले ही विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है।इसमें पिछले 25 वर्षों में राज्य द्वारा हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियों को सदन के समक्ष रखा जाएगा,साथ ही राज्य के भविष्य के विकास एजेंडे और नीतिगत दिशा पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
मुख्य फोकस विषय
- राज्य के आर्थिक विकास,
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति,
- पर्यटन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग,
- महिला सशक्तिकरण,
- और उत्तराखंड को ‘देश का अग्रणी पर्वतीय राज्य’ बनाने की रणनीति पर विमर्श शामिल है।
इतिहास दोहराया: 2015 में प्रणब मुखर्जी ने किया था संबोधन
यह दूसरा अवसर है जब उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को राष्ट्रपति का मार्गदर्शन मिला है।
2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विशेष सत्र को संबोधित करते हुए राज्य के विकास, लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक मूल्यों पर जोर दिया था। अब, रजत जयंती वर्ष में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन इस ऐतिहासिक यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।